Hamas New Leader Election 2026: खंडहर बन चुके गाजा में मौत के साये में चुना जाएगा याह्या सिनवार का वारिस…
Hamas New Leader Election 2026: गाजा पट्टी में मची भीषण तबाही और इजरायली हमलों के लगातार जारी रहने के बीच, हमास अब अपने संगठन की कमान किसी नए हाथ में सौंपने की तैयारी कर रहा है। याह्या सिनवार की मौत के बाद से खाली पड़े इस सर्वोच्च पद को भरने के लिए संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो (Hamas leadership succession) की प्रक्रिया इसी महीने पूरी की जा सकती है, जिससे संगठन को एक नई दिशा मिल सके। युद्ध की विभीषिका के बीच यह चुनाव न केवल हमास के वजूद के लिए अहम है, बल्कि यह भविष्य में गाजा की राजनीति को भी तय करेगा।

इजरायली हमलों में ढह गया हमास का पुराना किला
7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद शुरू हुए इस भीषण संघर्ष ने गाजा को एक ऐसे खंडहर में तब्दील कर दिया है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी। स्वास्थ्य अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार अब तक 71,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे (Gaza war humanitarian crisis) की स्थिति गंभीर हो गई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण युद्धविराम की कोशिशें हुई हैं, लेकिन इजरायल अभी भी क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है। हमास पर अब न केवल दुश्मन का बल्कि अपने ही लोगों की नाराजगी का दबाव भी बढ़ रहा है।
कतर से तय होगी गाजा की नई तकदीर
हमास के नए प्रमुख की दौड़ में इस समय दो बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं—खलील अल-हय्या और खालिद मशाल। ये दोनों ही नेता फिलहाल कतर में रहकर संगठन की गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। इन (Hamas political bureau members) के कंधों पर अब उस संगठन को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी है, जिसके कई शीर्ष कमांडर इजरायली ऑपरेशंस में मारे जा चुके हैं। इस्माइल हानियेह और याह्या सिनवार जैसे कट्टरपंथी नेताओं की मौत के बाद हमास को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर तालमेल बिठा सके।
शूरा परिषद के गुप्त मतदान से होगा फैसला
हमास में नेता चुनने की प्रक्रिया काफी गोपनीय और लोकतांत्रिक मानी जाती है, जिसमें 50 सदस्यीय शूरा परिषद हिस्सा लेती है। इस परिषद में वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और विदेशों में रह रहे निर्वासित सदस्य शामिल होते हैं जो (Hamas Shura Council voting) के जरिए अपने नए मुखिया का चुनाव करते हैं। बताया जा रहा है कि मतदान की प्रक्रिया गुपचुप तरीके से शुरू हो चुकी है, ताकि इजरायल को इसकी भनक न लगे। संगठन केवल प्रमुख ही नहीं, बल्कि उप-नेता के पद के लिए भी सालेह अल-अरौरी के विकल्प की तलाश कर रहा है।
ईरान और सुन्नी देशों के बीच फंसा हमास का भविष्य
हमास के भीतर इस समय दो अलग-अलग विचारधाराओं वाले गुटों के बीच खींचतान की खबरें भी सामने आ रही हैं। खालिद मशाल को एक व्यावहारिक नेता माना जाता है जिनके सुन्नी मुस्लिम देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, जबकि खलील अल-हय्या (Iran backed militant groups) की विचारधारा के ज्यादा करीब माने जाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि हमास का अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि कमान किसके हाथ में जाती है। क्या संगठन ईरान के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करेगा या फिर अरब देशों के साथ मिलकर कोई नया कूटनीतिक रास्ता तलाशेगा?
दयनीय हालात में 20 लाख लोगों का दर्द
गाजा की लगभग 20 लाख की आबादी इस समय दाने-दाने को मोहताज है और उनके पास रहने के लिए छत तक नहीं बची है। युद्धविराम के बावजूद इजरायली कब्जे और हवाई हमलों ने (Civilian displacement in Gaza) की समस्या को दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी बना दिया है। गाजा के भीतर ही अब हमास की रणनीतियों की आलोचना होने लगी है, क्योंकि आम जनता को लगता है कि संगठन के फैसलों की कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है। पुनर्निर्माण की बातें तो हो रही हैं, लेकिन जब तक स्थायी शांति नहीं आती, तब तक राहत कार्य शुरू होना असंभव सा लगता है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और हथियार डालने की चुनौती
अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश लगातार हमास पर दबाव बना रहे हैं कि वह पूरी तरह से हथियार डाल दे ताकि गाजा में शांति बहाल हो सके। हालांकि हमास का नेतृत्व इस (International pressure on Hamas) के सामने झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है। संगठन के भीतर कुछ लोग अब ‘सामूहिक नेतृत्व’ के मॉडल पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि किसी एक व्यक्ति की मौत से संगठन को अपूरणीय क्षति न हो। इजरायल ने पहले ही साफ कर दिया है कि हमास का कोई भी नया उत्तराधिकारी उसकी हिट-लिस्ट से बाहर नहीं होगा, जिससे खतरे की घंटी हमेशा बजती रहेगी।
1987 के बाद हमास के अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई
हमास ने अपनी स्थापना के बाद से पिछले चार दशकों में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन 2026 की यह स्थिति सबसे भयावह है। संगठन का ढांचा बिखर चुका है, सैन्य क्षमताएं आधी रह गई हैं और (Survival of militant organizations) का संकट मंडरा रहा है। इजरायल की जिद है कि वह हमास को जड़ से खत्म करके ही दम लेगा, जबकि हमास के चुनाव की तैयारी यह संदेश दे रही है कि वह हार मानने को तैयार नहीं है। इस चुनावी प्रक्रिया का परिणाम न केवल हमास का भाग्य तय करेगा, बल्कि आने वाले महीनों में मध्य पूर्व की शांति और अस्थिरता का भी फैसला करेगा।



