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India EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक समझौता, पाकिस्तान को सताने लगा निर्यात घटने का डर

India EU FTA: दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस्लामाबाद को अब इस बात का डर सता रहा है कि यूरोपीय देशों के बाजारों में उसकी हिस्सेदारी कम हो सकती है। पाकिस्तान की ओर से गुरुवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया गया कि इस बड़े समझौते के बाद वह स्थिति का आकलन कर रहा है और यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है। गौरतलब है कि मंगलवार को जब इस डील पर मुहर लगी, तो यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘सभी व्यापारिक समझौतों की जननी’ करार दिया था, जिससे इसकी वैश्विक अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

India EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक समझौता, पाकिस्तान को सताने लगा निर्यात घटने का डर
India EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक समझौता, पाकिस्तान को सताने लगा निर्यात घटने का डर

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता और शुरू किया मंथन

भारत-ईयू समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वे इस डील की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से जब यह पूछा गया कि क्या इस समझौते का सीधा असर पाकिस्तान के निर्यात पर पड़ेगा, तो उन्होंने कूटनीतिक रुख अपनाते हुए कहा कि उनका देश यूरोपीय संघ के साथ अपने लंबे और पारस्परिक रूप से लाभकारी रिश्तों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान को डर है कि अब तक उसे यूरोपीय बाजार में जो बढ़त हासिल थी, वह भारत के साथ इस नई प्रतिस्पर्धा में फीकी पड़ सकती है।

जीएसपी प्लस का सुरक्षा कवच और खत्म होती मियाद

पाकिस्तान की इस घबराहट के पीछे एक बड़ी तकनीकी वजह भी है। साल 2014 से पाकिस्तान यूरोपीय संघ की ‘जीएसपी प्लस’ (GSP+) योजना का लाभ उठा रहा है, जिसके तहत उसके उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बिना किसी आयात शुल्क (Duty-Free) के प्रवेश मिलता है। इसी सुविधा के दम पर पाकिस्तान के टेक्सटाइल निर्यात में पिछले वर्षों में 100 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। हालांकि, यह मौजूदा अनुबंध अगले साल दिसंबर में समाप्त होने वाला है। अब जबकि भारत और यूरोपीय संघ के बीच सीधी डील हो चुकी है, तो भारतीय कपड़ा उद्योग को भी वही सुविधाएं मिलेंगी जो अब तक पाकिस्तान के पास थीं। ऐसे में पाकिस्तान का बाजार से बाहर होने का डर पूरी तरह तर्कसंगत नजर आता है।

द्विपक्षीय व्यापार और किफायती उत्पादों की दलील

पाकिस्तानी प्रवक्ता ने यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को ‘विन-विन’ मॉडल बताते हुए कहा कि उनका कपड़ा निर्यात यूरोपीय ग्राहकों की जरूरतों को किफायती दामों पर पूरा करता है। पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के बीच वर्तमान में करीब 12 अरब यूरो का वार्षिक व्यापार होता है। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह अपनी आर्थिक स्थिति को बचाने के लिए यूरोपीय संघ को यह समझाने में सफल रहे कि भारत के साथ नई दोस्ती के बावजूद पाकिस्तान की अहमियत कम नहीं होनी चाहिए। लेकिन जानकारों का मानना है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने के बाद यूरोपीय देश गुणवत्ता और मात्रा के मामले में भारत को प्राथमिकता दे सकते हैं।

केवल पाकिस्तान ही नहीं, बांग्लादेश के लिए भी खतरे की घंटी

भारत-ईयू की इस नई साझेदारी का असर केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के व्यापारिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। अब तक पाकिस्तान और बांग्लादेश को यूरोपीय बाजारों में जो रियायती लाभ मिलते थे, वे भारत को नहीं मिलते थे, जिससे भारतीय निर्यातकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था। अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। भारत के पास कच्चे माल की प्रचुरता और विशाल उत्पादन क्षमता है। समझौते के बाद भारतीय व्यापारियों के लिए यूरोप के रास्ते खुल गए हैं, जिससे आने वाले समय में दक्षिण एशिया से होने वाले कपड़ा निर्यात में भारत का दबदबा बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

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