IranOil – युद्ध के बीच ईरानी तेल को लेकर ट्रंप के बयान से नई बहस
IranOil – पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के तेल संसाधनों को लेकर अमेरिका की मंशा पर नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि अमेरिका ईरान के तेल पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन उन्होंने यह जरूर संकेत दिया कि इस विषय पर चर्चा हुई है। ट्रंप के बयान के बाद ईरान की ओर से पहले लगाए गए आरोप भी फिर से सुर्खियों में आ गए हैं, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका वैश्विक तेल संसाधनों पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप ने संकेत दिया, लेकिन साफ तौर पर नहीं कही बात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस विषय पर सीमित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इस मुद्दे पर विचार किया है, लेकिन फिलहाल इस पर विस्तार से चर्चा करना जल्दबाजी होगी।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान वेनेजुएला का उदाहरण भी दिया। उनका कहना था कि दुनिया ने पहले भी ऐसे हालात देखे हैं, इसलिए इस विषय पर कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी प्रशासन किसी औपचारिक योजना पर काम कर रहा है या नहीं।
इससे पहले पिछले महीने ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका को अपने एक नए सहयोगी से लगभग 80 मिलियन बैरल तेल प्राप्त हुआ है। उस बयान के बाद भी ऊर्जा बाजार से जुड़े विश्लेषकों के बीच कई तरह की अटकलें सामने आई थीं।
ईरान ने लगाया तेल संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश का आरोप
ईरान ने पहले ही अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका का वास्तविक उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष के बहाने ऊर्जा संसाधनों पर अपना प्रभाव बढ़ाना है।
ईरान का दावा है कि यदि अमेरिका ईरान और वेनेजुएला दोनों के तेल भंडार पर प्रभाव स्थापित कर लेता है, तो वैश्विक तेल संसाधनों के बड़े हिस्से पर उसका नियंत्रण हो सकता है। ईरानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि अमेरिका इस पूरे संघर्ष में इजरायल के हितों का समर्थन कर रहा है और इसी संदर्भ में क्षेत्रीय ऊर्जा राजनीति भी प्रभावित हो रही है।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इन आरोपों को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया है और उसका कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।
ऊर्जा बाजार को लेकर व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस ने तेल बाजार में आई हालिया उथल-पुथल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी अस्थायी हो सकती है। प्रशासन का दावा है कि ऊर्जा बाजार को संतुलित रखने के लिए पहले से रणनीति तैयार की गई थी।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने से काफी पहले ही ऊर्जा आपूर्ति और बाजार स्थिरता को लेकर योजनाएं बनाई गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विभिन्न विकल्पों की लगातार समीक्षा कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके।
उनके अनुसार, यदि जरूरत पड़ी तो बाजार को स्थिर रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव
ईरान से जुड़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी तेज हलचल देखने को मिली। पश्चिम एशिया में उत्पादन और समुद्री परिवहन पर संभावित खतरे के कारण सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सुबह के कारोबार में 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि दिन के बाद के सत्र में इसमें कुछ गिरावट आई और कीमत लगभग 101 डॉलर के आसपास आ गई।
इसी तरह अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 119.48 डॉलर तक पहुंचने के बाद घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। ऊर्जा बाजार में इस तेज उतार-चढ़ाव का असर दुनिया के कई शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला, जहां निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई।
जी-7 देशों के फैसले से कीमतों में आई नरमी
तेल की कीमतों में आई गिरावट के पीछे उन खबरों को भी कारण माना गया, जिनमें कहा गया था कि जी-7 देश रणनीतिक तेल भंडार से आपूर्ति जारी करने पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि बाद में समूह के देशों ने फिलहाल अपने सुरक्षित भंडार से तेल जारी करने का फैसला टाल दिया। फ्रांस के वित्त मंत्री ने कहा कि जी-7 देश बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यदि जरूरत पड़ी तो कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी सामरिक तेल भंडार के इस्तेमाल की संभावना को कम बताते हुए कह चुके हैं कि अभी ऐसी स्थिति नहीं आई है, जिसमें इस विकल्प का सहारा लेना पड़े।



