IranUSCeasefire – पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल, पूरी तरह ठप हुई वार्ता
IranUSCeasefire – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की ओर से की जा रही मध्यस्थता फिलहाल सफल नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संभावित युद्धविराम पर बातचीत अब पूरी तरह रुक गई है। ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह मौजूदा परिस्थितियों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की बैठक के लिए तैयार नहीं है। इस स्थिति ने शांति प्रयासों को बड़ा झटका दिया है।

ईरान ने अमेरिकी शर्तों को बताया अस्वीकार्य
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अपनी पुरानी शर्तों को दोहराते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका युद्ध से जुड़े नुकसान की भरपाई नहीं करता, अपने सैन्य ठिकानों को क्षेत्र से नहीं हटाता और भविष्य में हमले न करने की गारंटी नहीं देता, तब तक वह किसी समझौते पर विचार नहीं करेगा। इन मांगों पर सहमति न बनने के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका की वर्तमान मांगें उसके लिए स्वीकार्य नहीं हैं।
पाकिस्तान की पहल नहीं ला सकी परिणाम
पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान पर्दे के पीछे कूटनीतिक कोशिशों में जुटा हुआ था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार ने सार्वजनिक रूप से वार्ता की मेजबानी की पेशकश भी की थी। पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से तैयार किए गए प्रस्तावों को ईरान तक पहुंचाया, जिसमें युद्धविराम के लिए कई बिंदु शामिल थे। इसके अलावा, चीन के साथ मिलकर एक अलग शांति प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। बावजूद इसके, दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी और सख्त रुख के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।
संघर्ष ने बातचीत की संभावनाएं और कमजोर कीं
हालिया सैन्य घटनाओं ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य विमान को मार गिराने का दावा और उसके बाद की गतिविधियों ने तनाव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, एक पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। ऐसे घटनाक्रम शांति वार्ता की संभावनाओं को और कमजोर कर रहे हैं।
तुर्की और मिस्र ने शुरू की नई पहल
जब इस्लामाबाद के जरिए बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी, तो अब तुर्की और मिस्र जैसे देश नए विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। ये देश ऐसे स्थानों की तलाश कर रहे हैं जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोबारा शुरू हो सके। कतर की राजधानी दोहा और तुर्की का इस्तांबुल संभावित स्थानों के रूप में सामने आए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य किसी तरह संवाद की प्रक्रिया को फिर से शुरू करना है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना विवाद का केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच मतभेदों की एक बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री मार्ग भी है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक संभावित समझौते में यह प्रस्ताव शामिल था कि यदि ईरान इस मार्ग को पूरी तरह खोल देता है, तो युद्धविराम पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
अमेरिकी रुख और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भी सख्त बयान सामने आए हैं, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि रणनीतिक हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी दबाव में निर्णय नहीं लेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने युद्धविराम को लेकर सामने आई कुछ बातों को गलत बताया है और अपने रुख पर कायम रहने की बात दोहराई है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ता असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर अब अन्य देशों पर भी दिखाई देने लगा है। इराक में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है और अमेरिकी नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। इन हालातों ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्र में तनाव अभी कम होने के संकेत नहीं दे रहा है।



