अंतर्राष्ट्रीय

IranUSRelations – ट्रंप के दावों पर ईरान का कड़ा जवाब, तनाव बरकरार

IranUSRelations – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने बेहद कम समय में कई भ्रामक दावे किए, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। गालिबाफ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के बयानों से न तो किसी सैन्य संघर्ष का परिणाम बदलेगा और न ही कूटनीतिक स्तर पर कोई ठोस समाधान निकल पाएगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप के कौन-कौन से बयान उनके निशाने पर थे, लेकिन उनके बयान से दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति साफ झलकती है।

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अमेरिकी दावों को ईरान ने किया खारिज

ईरान की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को अमेरिका के हवाले करने के लिए तैयार है। इस दावे को तेहरान ने तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि देश अपनी परमाणु संपत्तियों को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं कर रहा है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है, जिससे पहले से मौजूद तनाव और गहरा सकता है।

मीडिया और सोशल मीडिया पर भी उठाए सवाल

गालिबाफ ने अमेरिका पर यह आरोप भी लगाया कि वह मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए वैश्विक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, इस तरह की रणनीतियां लोगों की धारणा को प्रभावित करने के लिए अपनाई जा रही हैं, लेकिन ईरान की जनता इनसे प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश के अंदरूनी हालात को लेकर बाहरी दावे वास्तविकता से काफी अलग हैं और इन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनी

ईरान ने एक बार फिर रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। गालिबाफ ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपनी आर्थिक नाकेबंदी जारी रखता है, तो ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को ईरान द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा और आवश्यक अनुमति भी लेनी पड़ेगी। यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है।

ट्रंप के दावे और जमीनी स्थिति में अंतर

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह दावा किया था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को हमेशा के लिए खुला रखने के लिए सहमत हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भी लिखा कि अब इस मार्ग का इस्तेमाल वैश्विक दबाव के हथियार के रूप में नहीं किया जाएगा। हालांकि ईरान की ओर से इस दावे का समर्थन नहीं किया गया है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जलडमरूमध्य को लेकर कोई स्थायी प्रतिबद्धता नहीं दी गई है और परिस्थितियों के अनुसार ही निर्णय लिए जाएंगे।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। अनुमान के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है। इससे पहले भी जब इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ा था, तब तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा था और आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए आपात कदम उठाने पड़े थे।

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