RafaleDeal – मैक्रों ने राफेल समझौते को बताया भारत की मजबूती का आधार
RafaleDeal – फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत दौरे के दौरान राफेल लड़ाकू विमान समझौते पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब दिया। एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे मैक्रों ने कहा कि यह सौदा केवल रक्षा खरीद नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और रणनीतिक सहयोग का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर बैठक से पहले पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस समझौते को भारत की सुरक्षा क्षमता और औद्योगिक विकास के लिए अहम बताया।

राफेल समझौते पर मैक्रों का स्पष्ट पक्ष
पत्रकारों के सवालों के जवाब में मैक्रों ने कहा कि भारत ने राफेल विमानों की नई खेप खरीदने की इच्छा दोहराई है। उन्होंने इसे रक्षा सहयोग में एक नया और ठोस कदम बताया। भारत में इस सौदे को लेकर समय-समय पर उठे विवादों पर उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय उद्योग को लाभ होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उनके मुताबिक, सौदे में भारतीय हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई जा रही है, जो दोनों सरकारों और कंपनियों के बीच चल रहे संवाद का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी समझौते से साझेदारी मजबूत होती हो और सुरक्षा क्षमता में इजाफा होता हो, तो उसकी आलोचना का आधार समझ से परे है।
भारतीय घटकों के उपयोग पर जोर
मैक्रों ने यह संकेत दिया कि फ्रांस भविष्य में रक्षा सौदों में अधिक से अधिक भारतीय उपकरण और तकनीकी साझेदारी को शामिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राफेल परियोजना पहले से जारी सहयोग को और मजबूती देती है। इसके साथ ही उन्होंने पनडुब्बी निर्माण, इंजन तकनीक और हेलीकॉप्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की बात कही। टाटा और एयरबस के बीच चल रहे सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के औद्योगिक रिश्ते रक्षा क्षेत्र से आगे भी विस्तार पा रहे हैं। इससे तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और विनिर्माण क्षमता में वृद्धि होगी।
नए विमानों की खरीद को मंजूरी
मैक्रों की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए राफेल जेट खरीदने की मंजूरी दी है। प्रस्ताव के अनुसार अधिकांश विमान भारत में तैयार किए जाएंगे, जबकि कुछ सीधे फ्रांस से मिलेंगे। इसके अलावा नौसेना के लिए पी-8आई समुद्री गश्ती विमान और आधुनिक मिसाइलों की खरीद को भी स्वीकृति दी गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से तीनों सेनाओं की सामरिक क्षमता में संतुलित बढ़ोतरी होगी।
वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या चिंता का कारण
भारतीय वायुसेना लंबे समय से नए लड़ाकू विमानों की मांग करती रही है। वर्तमान में स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है, जबकि आवश्यकता 42 स्क्वाड्रन की बताई जाती है। यह स्थिति बीते दशकों में सबसे निचले स्तरों में से एक मानी जा रही है। स्वदेशी तेजस विमान को बड़ी संख्या में शामिल करने की योजना थी, लेकिन इंजन आपूर्ति में देरी के कारण प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी। वायुसेना प्रमुख ने भी इस देरी पर चिंता जताई थी। ऐसे में राफेल की नई खेप को तत्काल जरूरतों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
सौदे के बाद कैसी होगी ताकत
प्रस्तावित खरीद पूरी होने पर भारतीय वायुसेना के पास लगभग 150 राफेल विमान होंगे। वहीं भारतीय नौसेना को 26 राफेल समुद्री संस्करण मिलने की संभावना है, जो विमानवाहक पोत से संचालन में सक्षम होंगे। विश्लेषकों का कहना है कि इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति और मजबूत होगी। हाल के वर्षों में भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया है। दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। राफेल समझौता इसी व्यापक रणनीतिक दृष्टि का हिस्सा माना जा रहा है।



