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अंतर्राष्ट्रीय

Syria Alawite Sect Conflict: सीरिया की सुलगती गलियों में बह रहा है अपनों का खून, फिर से गृहयुद्ध की आग में झुलसने वाला है देश…

Syria Alawite Sect Conflict: सीरिया का ऐतिहासिक शहर होम्स एक बार फिर धमाकों और चीखों से दहल उठा है। रविवार का दिन इस शहर के लिए काल बनकर आया, जब धार्मिक अल्पसंख्यक अलवी समुदाय के प्रदर्शनकारियों और उनके विरोधी गुटों के बीच हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस खूनी संघर्ष में (Casualties in Syria Unrest) कम से कम तीन लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। यह हिंसा उस समय भड़की जब लोग अपने अधिकारों और सुरक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे, लेकिन देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। दर्जनों लोग इस झड़प में गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

Syria Alawite Sect Conflict
Syria Alawite Sect Conflict

मस्जिद में हुए बम धमाके ने सुलगाई नफरत की आग

इस ताजा हिंसा की पटकथा दो दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी। शुक्रवार को होम्स की एक अलवी मस्जिद में नमाज के दौरान एक भीषण बम धमाका हुआ था, जिसमें 8 नमाजियों की मौत हो गई थी और 18 अन्य घायल हो गए थे। इस कायराना (Religious Place Terror Attacks) हमले ने समुदाय के भीतर डर और आक्रोश भर दिया था। इसी हमले के विरोध में हजारों की तादाद में लोग लजीकिया, तरतूस और होम्स की सड़कों पर जमा हुए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और प्रशासन उन्हें सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल रहा है।

तरतूस और लजीकिया में सुरक्षा बलों पर हमला

हिंसा की आग केवल होम्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने तरतूस और लजीकिया जैसे शहरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। सीरियाई सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार, तरतूस क्षेत्र में एक पुलिस थाने को निशाना बनाकर हथगोला फेंका गया। इस हमले में (Security Forces Casualties) ड्यूटी पर तैनात दो सदस्य बुरी तरह घायल हो गए। लजीकिया में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई जब उग्र भीड़ ने सुरक्षा बलों की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। सरकारी समाचार एजेंसी ‘सना’ ने पुष्टि की है कि गोलीबारी की चपेट में आने से सुरक्षा बल का एक जवान शहीद हो गया है।

कट्टरपंथियों के निशाने पर अलवी संप्रदाय

अधिकारियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मस्जिद में हुए विस्फोट के पीछे सुनियोजित साजिश की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि विस्फोटक उपकरण पहले से ही मस्जिद के भीतर छिपाए गए थे। हालांकि, मुख्य संदिग्ध की पहचान अभी उजागर नहीं की गई है, लेकिन (Sectarian Violence in Middle East) के इस मामले की जिम्मेदारी ‘सराया अंसार अल-सुन्ना’ नामक एक कम चर्चित समूह ने ली है। इस संगठन ने अपने टेलीग्राम चैनल पर साफ तौर पर कहा कि उनका मकसद अलवी संप्रदाय के सदस्यों को खत्म करना था, जो सीरियाई राजनीति में अहम स्थान रखते हैं।

पत्थरबाजी और आगजनी से दहला लजीकिया शहर

रविवार को हुए इन प्रदर्शनों का आह्वान विदेश में रह रहे अलवी शेख गजल गजल ने किया था, जो ‘सुप्रीम अलवाइट इस्लामिक काउंसिल’ के प्रमुख हैं। लजीकिया की सड़कों पर मंजर बेहद खौफनाक था, जहां सरकार समर्थक प्रतिपक्षी गुट और अलवी प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों और फोटोग्राफरों ने देखा कि (Street Clashes and Arson) के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर पत्थर बरसाए। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए सुरक्षा बलों को हवाई फायरिंग का सहारा लेना पड़ा, ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं, जिनकी सही संख्या का पता अभी लगाया जा रहा है।

सांप्रदायिक दरार और सुरक्षा की चुनौती

सीरिया में अलवी समुदाय को निशाना बनाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हालिया घटनाओं ने देश में एक नई तरह की असुरक्षा पैदा कर दी है। कट्टरपंथी समूहों द्वारा (Targeted Killings of Minorities) की इन वारदातों ने शासन के इकबाल पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। तरतूस के पुलिस थाने पर हुआ ग्रेनेड हमला यह दर्शाता है कि हमलावर अब सीधे राज्य की मशीनरी को चुनौती देने से भी नहीं कतरा रहे हैं। सीरियाई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन दो समुदायों के बीच बढ़ती नफरत की दीवार को ढहाने और कानून व्यवस्था बहाल करने की है।

गम और गुस्से के बीच हुआ अंतिम संस्कार

शनिवार को मस्जिद हमले में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन और तनावपूर्ण था। हजारों की भीड़ ने (Community Funeral Protests) के दौरान नारेबाजी की और न्याय की मांग की। लोगों का कहना है कि वे अपने ही देश में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। अलवी समुदाय के बुजुर्गों ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों को जल्द से जल्द सजा नहीं मिली, तो यह विरोध प्रदर्शन और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल, प्रभावित इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता और सीरिया का भविष्य

सीरिया में फिर से भड़कती इस हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मानवाधिकार संगठनों ने (Human Rights and Syria Crisis) के संदर्भ में अपील की है कि निर्दोष नागरिकों की जान की रक्षा की जाए। होम्स, जो कभी सीरियाई क्रांति का केंद्र था, अब धार्मिक नफरत का अड्डा बनता जा रहा है। अगर समय रहते इन झड़पों को नहीं रोका गया, तो सीरिया एक बार फिर उसी गृहयुद्ध के काले दौर में लौट सकता है जिससे वह बड़ी मुश्किल से उबरने की कोशिश कर रहा था। आने वाले कुछ दिन सीरिया की स्थिरता के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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