USIranConflict – ट्रंप का संकेत, होर्मुज खुले बिना भी खत्म हो सकता है युद्ध
USIranConflict – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोले बिना भी संघर्ष को समाप्त किया जा सकता है। यह बदलाव उस समय सामने आया है, जब क्षेत्र में हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं और वैश्विक बाजार पर इसका असर दिखने लगा है।

रणनीति में बदलाव के पीछे वजह
अमेरिकी प्रशासन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हालिया आकलन में यह पाया गया कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को जबरन खोलने की कोशिश की जाती है, तो युद्ध लंबा खिंच सकता है। पहले जहां इस संघर्ष को कुछ हफ्तों में खत्म करने की योजना थी, वहीं अब इसे सीमित रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कारण अमेरिका अपने मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए युद्ध समाप्त करने के विकल्प तलाश रहा है।
कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की तैयारी
नई रणनीति के तहत अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उद्देश्य यह है कि तेहरान को इस स्थिति में लाया जाए, जहां वह व्यापारिक मार्गों को फिर से खोलने के लिए तैयार हो। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की भी कोशिश जारी है।
विकल्प के तौर पर सहयोगियों पर निर्भरता
रिपोर्ट्स में यह भी संकेत दिया गया है कि यदि यह रणनीति सफल नहीं होती, तो अमेरिका अपने सहयोगी देशों पर दबाव बना सकता है कि वे जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए पहल करें। यूरोप और खाड़ी देशों की भूमिका ऐसे हालात में अहम हो सकती है, क्योंकि यह क्षेत्र सीधे तौर पर इस मार्ग से प्रभावित होता है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और असर
हाल के हफ्तों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए गए, जिसके जवाब में ईरान ने भी सैन्य कार्रवाई की। इस टकराव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए इसकी नाकेबंदी का असर दुनिया भर के ईंधन बाजार पर पड़ रहा है।
इजरायल का सख्त रुख कायम
जहां अमेरिका अब युद्ध को सीमित करने की बात कर रहा है, वहीं इजरायल का रुख अब भी आक्रामक बना हुआ है। इजरायली नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल संघर्ष खत्म करने की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। उनके अनुसार, सैन्य अभियान अभी जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
खाड़ी देशों की अलग राय
इस बीच, खाड़ी देशों का रुख अमेरिका से थोड़ा अलग नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ सहयोगी देश मानते हैं कि ईरान पर अभी और दबाव बनाए रखने की जरूरत है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में संघर्ष को जल्दी समाप्त करना रणनीतिक रूप से सही नहीं होगा।
अनिश्चितता के बीच बढ़ती वैश्विक चिंता
पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्ग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे सीधे प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका कूटनीतिक रास्ते पर कितना आगे बढ़ता है और क्या इससे तनाव कम हो पाता है।



