झारखण्ड

BudgetReview – विधानसभा घोषणाओं की निगरानी को बनेगी विशेष समिति

BudgetReview – झारखंड की विधानसभा में की गई घोषणाओं की प्रगति पर नजर रखने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बुधवार को सदन में बताया कि घोषणाओं की समीक्षा और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह घोषणा उस समय आई जब बजट पर आम चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया।

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भाजपा विधायक राज सिन्हा ने चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया था कि सदन में की गई 68 घोषणाओं में से केवल आठ ही जमीन पर उतर सकी हैं। इसी के जवाब में वित्त मंत्री ने समीक्षा तंत्र को मजबूत करने की बात कही।

विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बनेगी समिति

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता राज्य विकास आयुक्त करेंगे। इसमें वित्त सचिव के साथ एक या दो अन्य विभागों के सचिवों को भी शामिल किया जाएगा। समिति का मुख्य उद्देश्य विधानसभा में की गई घोषणाओं की स्थिति का आकलन करना और उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू कराना होगा।

किशोर ने कहा कि सदन में की गई घोषणाएं केवल वक्तव्य नहीं होतीं, बल्कि उन्हें अमल में लाना कार्यपालिका की जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है।

राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्री के भाषणों की भी समीक्षा

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार समिति न केवल बजट घोषणाओं, बल्कि उसी वित्तीय वर्ष के दौरान राज्यपाल, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री द्वारा विधानसभा में किए गए प्रमुख वादों की भी समीक्षा करेगी। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि घोषणाएं कागजों तक सीमित न रहें।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और विभागों के बीच समन्वय भी बेहतर होगा।

केंद्र पर सहयोग न मिलने का आरोप

बजट बहस के दौरान मंत्री किशोर ने केंद्र सरकार पर राज्य को मिलने वाली वित्तीय सहायता में कमी का आरोप भी लगाया। उन्होंने विपक्ष के उस दावे को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर जमा न करने के कारण सहायता नहीं मिल रही है।

किशोर ने कहा कि आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बावजूद अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उनका आरोप था कि राजनीतिक कारणों से राज्य को सहयोग में कमी की जा रही है।

भाजपा ने बजट को बताया निराशाजनक

इससे पहले भाजपा विधायक राज सिन्हा ने बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे ‘नई बोतल में पुरानी शराब’ बताते हुए कहा कि इसमें कोई ठोस नई दिशा नहीं दिखती। सिन्हा ने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं, जिनमें धान की खरीद 3,200 रुपये प्रति क्विंटल करने, रसोई गैस सिलेंडर 450 रुपये में उपलब्ध कराने और 10 लाख रोजगार सृजित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में घोषणाएं अधूरी हैं।

सत्ता पक्ष का बचाव

वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक अनंत प्रताप देव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने का प्रयास किया गया है।

कांग्रेस विधायक और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर ओरांव ने बजट को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि इसमें महिलाओं के सशक्तीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सदन में चली बहस के बीच यह स्पष्ट हुआ कि घोषणाओं की प्रगति को लेकर जवाबदेही बढ़ाने की मांग तेज हो रही है। प्रस्तावित समिति से उम्मीद है कि वह वादों और उनके क्रियान्वयन के बीच की दूरी को कम करने में भूमिका निभाएगी।

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