उत्तराखण्ड

DisabilityQuota – उत्तराखंड में 234 व्याख्याताओं के प्रमाणपत्रों की होगी मेडिकल जांच

DisabilityQuota – उत्तराखंड में दिव्यांग कोटे के तहत नियुक्त व्याख्याताओं की पात्रता को लेकर उठे सवालों के बाद राज्य शिक्षा विभाग ने बड़ी जांच प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। विभाग ने राज्य गठन के बाद से इस श्रेणी में नियुक्त सभी 234 व्याख्याताओं की चिकित्सकीय जांच कराने का निर्णय लिया है। यह परीक्षण ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कराया जाएगा। यह कदम उन आरोपों के बाद उठाया गया है जिनमें कहा गया था कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर गलत प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की है।

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शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह जांच प्रक्रिया निर्धारित समय के भीतर पूरी की जाएगी और सभी संबंधित व्याख्याताओं को इसमें शामिल होना अनिवार्य होगा। यदि कोई निर्धारित तिथि पर जांच के लिए उपस्थित नहीं होता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

एम्स ऋषिकेश में होगी स्वास्थ्य जांच

विभागीय अधिकारियों के अनुसार सभी 234 व्याख्याताओं का स्वास्थ्य परीक्षण सात मार्च से दो अप्रैल के बीच एम्स ऋषिकेश में आयोजित किया जाएगा। जांच के लिए सप्ताह में दो दिन निर्धारित किए गए हैं। हर गुरुवार और शनिवार को सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया चलेगी।

एक दिन में लगभग 50 व्याख्याताओं की दिव्यांगता से संबंधित जांच की जाएगी, ताकि निर्धारित समय के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी हो सके। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम प्रत्येक मामले की चिकित्सकीय जांच करेगी और रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

मुख्य शिक्षा अधिकारियों को दिए गए निर्देश

इस पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेजे हैं। विभाग के अपर निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी करते हुए सभी अधिकारियों को आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने को कहा है।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन व्याख्याताओं की नियुक्ति दिव्यांग कोटे के अंतर्गत हुई है, उन्हें निर्धारित समय पर एम्स ऋषिकेश पहुंचकर अपनी चिकित्सकीय जांच करानी होगी। जिला स्तर के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि सभी संबंधित शिक्षक निर्धारित तिथि पर उपस्थित हों।

अनुपस्थित रहने पर हो सकती है कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई व्याख्याता तय समय के भीतर मेडिकल परीक्षण के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों में विभाग एकतरफा कार्रवाई भी कर सकता है। आदेश में कहा गया है कि जो व्यक्ति जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं होगा, उसकी जिम्मेदारी स्वयं उसी की मानी जाएगी।

सरकार का कहना है कि यह कदम नियुक्तियों की पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक पात्र उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

फर्जी प्रमाणपत्र के आरोप के बाद शुरू हुई प्रक्रिया

दरअसल यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब दिव्यांग अधिकारों से जुड़े संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर गलत दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति प्राप्त की है। इस मामले को लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड की ओर से हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

याचिका में मांग की गई थी कि दिव्यांग कोटे से नियुक्त शिक्षकों की पात्रता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसी के बाद राज्य सरकार ने सभी संबंधित मामलों की चिकित्सा जांच कराने का निर्णय लिया।

दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई

राज्य के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा है कि सरकार के संज्ञान में जब भी इस प्रकार के मामले आते हैं, उनकी जांच कराई जाती है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी की पात्रता गलत पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एम्स ऋषिकेश के सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्रीनॉय मोहंती के अनुसार जांच प्रक्रिया को लेकर अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। इस मेडिकल जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक पैनल बनाया गया है, जिसकी अगुवाई यूरोलॉजी विभाग के डॉ. मृत्युंजय कुमार करेंगे।

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