DhanbadMayor – बागी जीत के बाद संजीव सिंह से भाजपा की नजदीकी
DhanbadMayor – धनबाद नगर निगम के मेयर पद पर जीत दर्ज करने वाले पूर्व विधायक संजीव सिंह के प्रति भाजपा का रुख अब बदला हुआ नजर आ रहा है। चुनाव के दौरान आधिकारिक समर्थन न मिलने और बागी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने के बावजूद, जीत के बाद पार्टी नेताओं की सक्रियता ने नए संकेत दिए हैं।

हाल ही में धनबाद के विधायक राज सिन्हा का सिंह मेंशन पहुंचकर संजीव सिंह को बधाई देना और सार्वजनिक रूप से शुभकामनाएं देना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे स्थानीय स्तर पर पार्टी के नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
विधायक की पहल और संदेश
राज सिन्हा ने मुलाकात के बाद जारी संदेश में संजीव सिंह को “छोटा भाई” बताते हुए उनके नेतृत्व में नगर निगम क्षेत्र के विकास की कामना की। इस दौरान झरिया विधायक रागिनी सिंह समेत कई स्थानीय नेता भी मौजूद रहे।
हालांकि, राज सिन्हा ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि धनबाद के विकास के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को मिलकर काम करना चाहिए। फिर भी राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों की ओर इशारा करती है।
पहले जारी हुआ था नोटिस
नगर निगम चुनाव के दौरान संजीव सिंह ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोक दी थी। इसके बाद पार्टी की ओर से उन्हें नोटिस भी जारी किया गया था। चुनाव प्रचार के समय वे संगठन की मुख्यधारा से अलग नजर आए।
अब चुनाव जीतने के बाद उनके समर्थक सोशल मीडिया पर उन्हें भाजपा विचारधारा से जुड़ा बताते हुए पोस्ट साझा कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि स्थानीय स्तर पर उनके समर्थन आधार को पार्टी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकती।
पार्टी के भीतर समर्थन और असहमति
सूत्रों के अनुसार, झारखंड भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का व्यक्तिगत समर्थन संजीव सिंह को पहले भी प्राप्त था। आधिकारिक टिकट न मिलने के बाद उन्होंने नामांकन से पहले कई नेताओं से विचार-विमर्श किया था।
उनकी जीत के बाद अब पार्टी के अंदर यह सवाल भी उठ रहा है कि स्थानीय जनभावना का आकलन करने में चूक कहां हुई। कुछ नेताओं की कथित नाराजगी और आंतरिक रणनीति को लेकर भी चर्चा तेज है।
नई राजनीतिक दिशा के संकेत
संजीव सिंह की जीत ने धनबाद की स्थानीय राजनीति को नई दिशा दी है। बागी उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल करना यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय स्तर पर उनका प्रभाव मजबूत बना हुआ है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा औपचारिक रूप से उनके साथ संबंधों को किस रूप में आगे बढ़ाती है। फिलहाल संकेत यही हैं कि टकराव की जगह सहयोग की राजनीति को प्राथमिकता दी जा सकती है।
धनबाद की नगर राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में संगठनात्मक फैसलों और गठजोड़ की दिशा तय कर सकता है।



