झारखण्ड

IrrigationProject – अमानत बैराज को मिली मंजूरी, पलामू के किसानों को बड़ी राहत

IrrigationProject – पलामू प्रमंडल के किसानों के लिए लंबे इंतजार के बाद एक अहम परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। अमानत नदी पर प्रस्तावित बैराज के निर्माण को लेकर राज्य सरकार ने नई प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की मंजूरी के बाद अब इस परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है। जल संसाधन विभाग को नोडल एजेंसी बनाते हुए सरकार ने इसे अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इस फैसले से क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

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भूमि विवाद सुलझने से खुला रास्ता

इस परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन वन भूमि से जुड़ा विवाद था, जो लंबे समय से काम को प्रभावित कर रहा था। ग्रामीणों और वन विभाग के बीच सहमति नहीं बनने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब सरकार ने एक व्यावहारिक समाधान निकालते हुए तय किया है कि विवादित जमीन का सीधा अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, पानी की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन को जमीन के नीचे से गुजारा जाएगा। इस व्यवस्था से जंगल को नुकसान पहुंचाए बिना परियोजना को पूरा किया जा सकेगा और किसानों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।

लंबे समय से अधर में थी योजना

अमानत बैराज परियोजना का इतिहास कई दशक पुराना है। पहली बार इसे 1974 में मंजूरी मिली थी, लेकिन इसके बाद समय-समय पर लागत में संशोधन होता रहा और काम आगे नहीं बढ़ सका। 1983 में पहली बार लागत बढ़ाई गई, जबकि 2003 में इसे फिर से संशोधित किया गया। इसके बावजूद वर्षों तक परियोजना ठप रही। हाल के वर्षों में इस पर आंशिक काम जरूर हुआ, लेकिन अब जाकर इसे अंतिम रूप देने की दिशा में ठोस पहल हुई है। नए संशोधित बजट के साथ सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता में रखा है।

लागत में बढ़ोतरी और नया बजट

परियोजना की लागत समय के साथ काफी बढ़ गई है। शुरुआती अनुमान जहां कुछ दर्जन करोड़ में था, वहीं अब यह बढ़कर सैकड़ों करोड़ तक पहुंच चुका है। सरकार ने हाल ही में तृतीय पुनरीक्षित प्राक्कलन के तहत 786 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। पहले चरण में पहले ही पर्याप्त राशि खर्च की जा चुकी है, जबकि शेष कार्यों के लिए अलग से बजट तय किया गया है। लागत में हुई इस वृद्धि के बावजूद सरकार इसे क्षेत्रीय विकास के लिए जरूरी निवेश मान रही है।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

इस बैराज के तैयार होने से पलामू जिले के कई प्रखंडों को सीधा फायदा होगा। पांकी, पाटन, तरहसी और मनातू जैसे इलाकों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। अनुमान है कि इस परियोजना के जरिए करीब 11,820 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव होगी। इससे किसानों की फसल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और उन्हें बेहतर आय के अवसर मिलेंगे।

पलायन रोकने में भी मदद की उम्मीद

क्षेत्र में सिंचाई की कमी लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है, जिसके कारण किसानों को खेती छोड़कर दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कृषि गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

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