NaxalOperation – झारखंड में सुरक्षाबलों ने की बड़ी कार्रवाई, कई इलाकों में बढ़ी सख्ती
NaxalOperation – झारखंड में नक्सल और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने कई जिलों में अभियान तेज कर दिया है। खूंटी जिले में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई से जुड़े दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की बात कही है। दूसरी ओर पलामू में डिजिटल निगरानी प्रणाली शुरू की गई है, जबकि पश्चिमी सिंहभूम के जंगलों में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।

खूंटी के जंगल में छापेमारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, खूंटी जिले के जिलिंगा जंगल में विशेष अभियान चलाकर पीएलएफआई के दो सदस्यों को पकड़ा गया। पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि संगठन से जुड़े कुछ लोग जंगल में जमा होकर किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। बताया गया कि वे संगठन का दायरा बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रंगदारी गतिविधियों को सक्रिय करने की कोशिश में थे।
सूचना के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम बनाई गई। अभियान के दौरान दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान उनके पास से दो देसी हथियार और कारतूस बरामद किए गए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार लोगों के संपर्क किन अन्य इलाकों तक फैले हुए थे।
पलामू में डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू
उधर पलामू जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस ने नई तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू की है। जिला पुलिस अब क्यूआर कोड आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए संवेदनशील इलाकों पर नजर रखेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य गश्ती व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
पुलिस ने जिले में करीब 650 स्थानों को चिन्हित किया है, जहां क्यूआर कोड लगाए गए हैं। इनमें बैंक, एटीएम, आभूषण दुकानें और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। मेदिनीनगर शहर में सबसे अधिक स्थानों पर यह व्यवस्था लागू की गई है।
रियल टाइम अपडेट से होगी निगरानी
नई प्रणाली के तहत पेट्रोलिंग टीम जब किसी चिन्हित स्थान पर पहुंचेगी तो वहां मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करेगी। स्कैन होते ही संबंधित टीम और जवानों की जानकारी सीधे पुलिस नियंत्रण प्रणाली तक पहुंच जाएगी। यह डेटा झारखंड पुलिस के ‘रक्षक’ ऐप पर रियल टाइम में अपडेट होगा।
पुलिस विभाग का मानना है कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि गश्ती दल तय समय पर संवेदनशील इलाकों में पहुंच रहे हैं या नहीं। साथ ही किसी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय को भी कम करने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग जिम्मेदारी
अधिकारियों ने बताया कि शहर के क्षेत्रों की निगरानी की जिम्मेदारी ‘टाइगर मोबाइल’ यूनिट को दी गई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में बीट पुलिस अधिकारी इस व्यवस्था की देखरेख करेंगे। गश्ती टीमों को दिन और रात दोनों समय नियमित रूप से चिन्हित स्थानों का दौरा करने का निर्देश दिया गया है।
पलामू के पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने कहा कि यह पहल सिर्फ अपराध रोकने के लिए नहीं बल्कि पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी शुरू की गई है। उनके अनुसार, तकनीक के उपयोग से आम लोगों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ेगा।
पश्चिमी सिंहभूम में जारी सर्च अभियान
इधर पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा और टोंटो-गोइलकेरा क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी है। हाल के दिनों में सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद जंगलों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान के दौरान दुर्गम क्षेत्रों से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह सामग्री जंगल में छिपाकर रखी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इलाके में अभी भी अभियान जारी रहेगा ताकि उग्रवादी नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया जा सके।