झारखण्ड

ParaTeachers – सुप्रीम कोर्ट से झारखंड के पारा शिक्षकों को मिली बड़ी राहत

ParaTeachers – सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पारा शिक्षकों से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को नई भर्ती प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि सहायक शिक्षक और सहायक आचार्य के 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर केवल पारा शिक्षकों से आवेदन लेकर नियुक्तियां की जाएं। इस फैसले को राज्य के हजारों पारा शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि हर शैक्षणिक सत्र में पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित रिक्त पदों पर नियमित रूप से भर्ती प्रक्रिया चलाई जाए। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए समय सीमा भी निर्धारित की है ताकि नियुक्ति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

भर्ती प्रक्रिया के लिए तय हुई समय सीमा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए चार सप्ताह के भीतर रिक्त पदों की पहचान कर विज्ञापन जारी किया जाए। इसके बाद विज्ञापन जारी होने से लेकर नियुक्ति पत्र देने तक की पूरी प्रक्रिया दस सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।

अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पारा शिक्षकों का स्वतः नियमितीकरण नहीं माना जाएगा, लेकिन उन्हें मौजूदा नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने का पूरा अधिकार रहेगा।

याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया फैसला

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत पारा शिक्षकों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने झारखंड प्राथमिक विद्यालय शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2012 और झारखंड प्रारंभिक विद्यालय सहायक आचार्य संवर्ग नियमावली 2022 के तहत बनी व्यवस्था को लागू करने पर भी जोर दिया।

इससे पहले पारा शिक्षकों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

लंबे समय से नियमितीकरण की मांग

पारा शिक्षक लंबे समय से सेवा नियमित करने और समान वेतन की मांग उठा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और शिक्षक पात्रता परीक्षा भी पास कर चुके हैं।

उन्होंने अदालत में यह दलील दी थी कि उनकी शैक्षणिक योग्यता और कार्य जिम्मेदारियां नियमित शिक्षकों के समान हैं। ऐसे में उन्हें भी समान काम के बदले समान वेतन और स्थायी सेवा का लाभ मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह माना कि पारा शिक्षकों को नियुक्ति प्रक्रिया में उचित अवसर मिलना चाहिए, लेकिन नियमितीकरण स्वतः नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि नियुक्तियां संबंधित नियमावली और चयन प्रक्रिया के अनुसार ही होंगी।

कानूनी जानकारों के मुताबिक अदालत का यह फैसला एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें पारा शिक्षकों को अवसर भी दिया गया है और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता भी बरकरार रखी गई है।

राज्य के हजारों शिक्षकों को मिलेगा फायदा

इस फैसले का असर झारखंड के हजारों पारा शिक्षकों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से नियुक्ति और सेवा शर्तों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। शिक्षा विभाग के सामने अब तय समय के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्देशों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो इससे राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को भी काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। वहीं पारा शिक्षकों को भी नियमित चयन प्रक्रिया में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

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