झारखण्ड

RecruitmentCase – फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर नियुक्ति पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

RecruitmentCase – झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक मामले पर सुनवाई हुई। यह याचिका दिव्यांग अभ्यर्थी शिवम कुमार की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया और आरक्षण से संबंधित मुद्दों को चुनौती दी गई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस मामले के अंतिम निर्णय का प्रभाव संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया पर भी पड़ेगा।

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मामले की अगली सुनवाई 16 जून को तय की गई है। अदालत में याचिकाकर्ता और आयोग दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए। भर्ती प्रक्रिया फिलहाल जारी है और चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

दिव्यांग श्रेणी को लेकर उठे सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि शिवम कुमार दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थी हैं और उन्होंने भर्ती परीक्षा में 178 अंक हासिल किए हैं। भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए तीन पद आरक्षित किए गए थे, लेकिन आयोग की ओर से इस श्रेणी का अलग कट-ऑफ जारी नहीं किया गया।

अदालत को बताया गया कि सामान्य वर्ग का कट-ऑफ 184 अंक निर्धारित किया गया है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि आरक्षित श्रेणी के तहत अभ्यर्थी को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए था। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि आयोग की ओर से दिव्यांग अभ्यर्थियों के मूल्यांकन को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

आयोग ने प्रमाणपत्र पर उठाया सवाल

झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से अदालत में पेश अधिवक्ता ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग श्रेणी का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों के लिए निर्धारित प्रारूप में प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य था। आयोग का कहना है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्र विज्ञापन में तय शर्तों के अनुरूप नहीं पाया गया।

जेपीएससी ने अदालत को बताया कि नियमों के अनुसार दस्तावेजों की जांच की गई और उसी आधार पर अभ्यर्थी को दिव्यांग श्रेणी का लाभ नहीं दिया गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन की शर्तों के अनुसार ही संचालित की जा रही है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर नजर

फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर के कुल 56 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। आयोग की ओर से चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन का काम वर्तमान में चल रहा है। अदालत की टिप्पणी के बाद अब इस भर्ती प्रक्रिया पर भी निगाहें टिक गई हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत इस मामले में कोई विशेष निर्देश जारी करती है तो उसका असर आरक्षण से जुड़े अन्य भर्ती मामलों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है।

अगली सुनवाई पर रहेगा ध्यान

मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी, जहां आयोग की ओर से अपना जवाब प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद अदालत आगे की प्रक्रिया तय करेगी। इस बीच भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर भी हाईकोर्ट की कार्यवाही पर बनी हुई है।

अदालत ने अभी किसी अंतिम निर्णय पर टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि मामले का अंतिम परिणाम नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आने वाली सुनवाई इस भर्ती विवाद के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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