SandMining – झारखंड में बालू खनन के लिए लागू हुई नई नियमावली
SandMining – झारखंड सरकार ने राज्य में बालू खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नई संशोधित नियमावली लागू कर दी है। खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा जारी इस नई व्यवस्था के तहत अब सामान्य श्रेणी के बालू पर रॉयल्टी 50 रुपये प्रति घन मीटर तय की गई है। वहीं अन्य श्रेणियों के बालू के लिए 25 रुपये प्रति टन की दर निर्धारित की गई है। नई नियमावली को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया गया है।

लीज अवधि की गणना में किया गया बदलाव
नई व्यवस्था के अनुसार अब बालू घाट या डिपॉजिट की लीज अवधि की गणना रजिस्ट्री और लीज डीड के निष्पादन की तारीख से की जाएगी। पहले यह प्रक्रिया अलग तरीके से संचालित होती थी। सरकार का कहना है कि इससे खनन प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी और अनुबंध संबंधी विवाद कम होंगे। बालू खनन के लिए पहली बार अलग नियमावली बनाकर शुल्क और प्रक्रियाएं स्पष्ट रूप से तय की गई हैं।
ई-ऑक्शन से होगा घाटों का आवंटन
सरकार ने बालू घाटों के आवंटन के लिए ई-ऑक्शन प्रक्रिया को अनिवार्य रखा है। सफल बोलीदाताओं को पांच वर्ष की अवधि के लिए खनन पट्टा दिया जाएगा। यह अवधि रजिस्ट्रेशन की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। विभाग के मुताबिक दूसरे और आगामी वर्षों के लिए बोली राशि पिछले वित्तीय वर्ष के वार्षिक खनिज रियायती मूल्य के 110 प्रतिशत के आधार पर तय की जाएगी।
मासिक रिटर्न जमा करना अनिवार्य
नई नियमावली के तहत सभी खनन पट्टाधारकों को हर महीने रिटर्न दाखिल करना होगा। संबंधित महीने का विवरण अगले महीने की 10 तारीख तक जमा करना जरूरी रहेगा। यदि तय समय सीमा के भीतर रिटर्न नहीं दिया गया तो प्रतिदिन 25 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि यह जुर्माना अधिकतम 2500 रुपये तक सीमित रहेगा। विभाग का मानना है कि इससे खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी।
तीन चरणों में जमा करनी होगी राशि
सरकार ने भुगतान प्रक्रिया को भी चरणबद्ध बनाया है। पहले वर्ष के लिए पहली किस्त कुल राशि का 50 प्रतिशत होगी, जिसे पहले परमिट जारी होने से पहले जमा करना होगा। इसके बाद दूसरी और तीसरी किस्त क्रमशः 25-25 प्रतिशत के रूप में तीसरी और चौथी तिमाही में जमा करनी होगी। इसके अलावा रॉयल्टी, डीएमएफटी अंशदान, जीएसटी, स्टांप ड्यूटी और अन्य कानूनी शुल्क भी अलग से देय होंगे।
ग्रामसभा की मंजूरी होगी जरूरी
अनुसूचित क्षेत्रों में बालू खनन के लिए सरकार ने अतिरिक्त प्रावधान किए हैं। अब पेसा नियमों के तहत संबंधित ग्रामसभा की सहमति लेना अनिवार्य होगा। सभी जरूरी स्वीकृतियां मिलने के बाद ही लीज प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित होगी और अवैध खनन पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण सुरक्षा की जिम्मेदारी भी तय
नई व्यवस्था में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। खनन कार्य के दौरान होने वाले नुकसान या किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी पट्टाधारक की होगी। साथ ही पौधरोपण, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े खर्च भी लीजधारक को ही उठाने होंगे। विभाग का मानना है कि इससे खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सकेगा।