WildlifeConflict – झारखंड में हाथियों के हमले से दो महिलाओं की हुई मौत
WildlifeConflict – झारखंड के गुमला और बोकारो जिलों में रविवार को जंगली हाथियों के हमलों में दो महिलाओं की जान चली गई। दोनों घटनाएं अलग-अलग इलाकों में हुईं, लेकिन इनके बाद स्थानीय लोगों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

गुमला जिले में महुआ बीनने गई महिला पर हमला
पहली घटना गुमला जिले के बसिया थाना क्षेत्र के करलौया गांव के पास जंगल में हुई। जानकारी के मुताबिक, 56 वर्षीय बिरसमनी उरांव रोजमर्रा की तरह महुआ फूल इकट्ठा करने जंगल गई थीं। इसी दौरान एक जंगली हाथी ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित परिवार को तत्काल राहत के तौर पर 25 हजार रुपये प्रदान किए गए हैं। विभाग के अनुसार, राज्य सरकार की नीति के तहत हाथी के हमले में मौत होने पर कुल 4 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है, जिसकी बाकी राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद दी जाएगी।
बोकारो के जंगल में हाथियों के झुंड ने ली दूसरी जान
दूसरी घटना बोकारो जिले के तेनुघाट रेंज के जगीश्वर जंगल में सामने आई। यहां करीब 12 हाथियों के झुंड ने 48 वर्षीय ठाकनी देवी को कुचल दिया। घटना रविवार सुबह लगभग 10 बजे की बताई जा रही है। बताया जाता है कि महिला जंगल क्षेत्र में मौजूद थीं, तभी हाथियों का झुंड वहां पहुंच गया और अचानक हमला कर दिया।
वन विभाग के अनुसार, इस मामले में भी पीड़ित परिवार को तत्काल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आगे की मुआवजा प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और लोग जंगल जाने से बच रहे हैं।
वन विभाग की बढ़ी सतर्कता, टीमें तैनात
दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तीन क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तैनात की गई हैं। ये टीमें लगातार हाथियों के झुंड की लोकेशन ट्रैक कर रही हैं और आसपास के गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल न जाएं और हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। साथ ही, रात के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने को भी कहा गया है।
बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष बना चिंता का विषय
झारखंड सहित पूर्वी भारत के कई राज्यों में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का क्षेत्र घटने और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण जंगली जानवरों के प्राकृतिक मार्ग बाधित हो रहे हैं। ऐसे में हाथियों के झुंड अक्सर भोजन और पानी की तलाश में गांवों की ओर रुख कर लेते हैं।
यह स्थिति न केवल ग्रामीणों के लिए खतरनाक बनती जा रही है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि दीर्घकालिक समाधान के लिए वन संरक्षण, सुरक्षित गलियारों (corridors) का निर्माण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद जरूरी है।



