AustraliaVisit – पीएम मोदी की यात्रा में रक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा जोर
AustraliaVisit- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित ऑस्ट्रेलिया यात्रा को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, व्यापार विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
विश्लेषकों के अनुसार, यात्रा का समय भी खास माना जा रहा है। हाल ही में जापान के शीर्ष नेतृत्व की भारत यात्रा के दौरान भी क्षेत्रीय सुरक्षा, विश्वसनीय सप्लाई चेन और चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने जैसे विषय प्रमुख रहे थे। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाली वार्ता को भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
रक्षा सहयोग को मिल सकती है नई गति
भारत और ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंधों को लगातार मजबूत कर रहे हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय दोनों देशों की साझेदारी के प्रमुख आधार बन चुके हैं। माना जा रहा है कि प्रस्तावित बातचीत में रक्षा तकनीक, समुद्री सहयोग और सुरक्षा से जुड़े नए क्षेत्रों पर भी विचार किया जा सकता है।
व्यापारिक संबंधों को मिलेगा विस्तार
द्विपक्षीय वार्ता में आर्थिक सहयोग भी प्रमुख एजेंडा रहेगा। वर्ष 2022 में लागू हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, द्विपक्षीय व्यापार का आकार 54 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंच चुका है, जिससे दोनों देशों के कारोबारी संबंध और मजबूत हुए हैं।
व्यापक आर्थिक समझौते पर जारी बातचीत
दोनों सरकारें अब व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता लागू होने के बाद निवेश, सेवा क्षेत्र, कृषि, खनिज और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिल सकती है। साथ ही वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंचाने का लक्ष्य भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
ऊर्जा और निवेश पर भी होगी चर्चा
द्विपक्षीय संबंधों में स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और निवेश सहयोग को भी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। दोनों देश ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित और विविध बनाने के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों में संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।