FuelSupply – तेल संकट की आशंकाओं के बीच सरकार ने स्थिति की दी जानकारी
FuelSupply – वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर के बीच भारत में ईंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में ईंधन बचाने की अपील करते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा कम करने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने और ऑनलाइन कक्षाओं को बढ़ावा देने का सुझाव दिया था। इसके बाद देशभर में यह सवाल उठने लगा कि क्या भारत में भी पेट्रोल और डीजल की राशनिंग लागू हो सकती है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल ईंधन की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

सरकार ने राशनिंग की अटकलों को किया खारिज
पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कहा है कि भारत में ईंधन की बिक्री पर किसी प्रकार का कोटा लागू करने की योजना नहीं है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने एक उद्योग सम्मेलन में कहा कि देश के पास पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है और आवश्यक कदम पहले से उठाए जा चुके हैं।
सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने वैकल्पिक स्रोतों से अतिरिक्त ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की है। मौजूदा सप्लायर देशों से आयात भी बढ़ाया गया है ताकि घरेलू बाजार पर किसी तरह का दबाव न पड़े।
आखिर क्या होती है फ्यूल राशनिंग
फ्यूल राशनिंग उस व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें सरकार पेट्रोल, डीजल या गैस की सीमित मात्रा तय कर देती है। ऐसी स्थिति आमतौर पर तब पैदा होती है जब किसी देश में तेल की भारी कमी हो जाए या आपूर्ति बाधित हो जाए। इस व्यवस्था के तहत हर व्यक्ति या वाहन के लिए निर्धारित मात्रा में ही ईंधन उपलब्ध कराया जाता है।
इसका उद्देश्य जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देना और बाजार में अफरा-तफरी रोकना होता है। कई देशों में यह व्यवस्था डिजिटल कार्ड, क्यूआर कोड या वाहन पंजीकरण के आधार पर लागू की गई है। हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसी किसी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है।
भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल के वैश्विक संकट के दौरान भी भारत ने करीब 60 दिन का पेट्रोल और डीजल भंडार सुरक्षित रखा है। वहीं एलपीजी का स्टॉक लगभग 45 दिनों के लिए उपलब्ध बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
दिलचस्प बात यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया गया। सरकार ने कर संबंधी उपायों और कंपनियों के सहयोग से कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की है। हालांकि इससे सार्वजनिक तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
कई देशों में लागू हैं सख्त नियम
दुनिया के कई देशों में ईंधन बचाने के लिए अलग-अलग तरह की सीमाएं लागू की गई हैं। श्रीलंका में वाहनों के लिए तय मात्रा में ही पेट्रोल और डीजल दिया जा रहा है। पाकिस्तान में भी सीमित ईंधन वितरण के नियम लागू किए गए हैं। यूरोप के कुछ देशों में डिजिटल पहचान और क्यूआर कोड के आधार पर ईंधन वितरण किया जा रहा है।
जर्मनी और फ्रांस के कुछ क्षेत्रों में एक बार में सीमित मात्रा में पेट्रोल खरीदने की अनुमति है। वहीं म्यांमार और स्लोवाकिया जैसे देशों में भी ईंधन उपयोग पर नियंत्रण संबंधी नियम लागू किए गए हैं। इन उदाहरणों के चलते भारत में भी लोगों के बीच चर्चा बढ़ी, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि देश की स्थिति फिलहाल स्थिर और नियंत्रण में है।