LabourCode – नए श्रम नियमों से बदलेंगे ऑफिसों में काम के घंटे और ओवरटाइम नियम, सभी पर होंगे लागू…
LabourCode – नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए लेबर कोड का असर देश के लाखों कर्मचारियों और कंपनियों पर पड़ने वाला है। खास तौर पर काम के घंटों और ओवरटाइम से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव को लेकर लोगों के बीच जिज्ञासा बनी हुई है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य कामकाजी माहौल को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाना है।

काम के घंटे में किया गया बदलाव
नए नियमों के तहत एक दिन में काम करने की अधिकतम सीमा को 9 घंटे से घटाकर 8 घंटे कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब यदि कोई कर्मचारी 8 घंटे से अधिक काम करता है, तो उस अतिरिक्त समय को ओवरटाइम माना जाएगा। पहले 9 घंटे तक के काम को सामान्य कार्य समय में शामिल किया जाता था, लेकिन अब 9वां घंटा ओवरटाइम की श्रेणी में आएगा।
ओवरटाइम भुगतान के नियम हुए स्पष्ट
ओवरटाइम को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की गई है। अब कर्मचारियों को अतिरिक्त काम के बदले उचित भुगतान देना अनिवार्य होगा। यह भुगतान उनकी मौजूदा सैलरी के आधार पर तय किया जाएगा। इससे पहले कई मामलों में अलग-अलग नियम लागू होते थे, लेकिन अब इसे स्पष्ट और समान रूप से लागू करने की कोशिश की गई है।
साप्ताहिक कार्य समय में कोई बदलाव नहीं
हालांकि, एक सप्ताह में काम करने की अधिकतम सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह ही यह सीमा 48 घंटे बनी रहेगी। यानी कंपनियों को अपने कर्मचारियों के कार्य समय का प्रबंधन इसी सीमा के भीतर करना होगा।
नए नियमों का दायरा हुआ व्यापक
पहले श्रम कानून मुख्य रूप से फैक्ट्रियों तक सीमित थे, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर अन्य क्षेत्रों तक कर दिया गया है। आईटी सेक्टर, कॉर्पोरेट दफ्तर, दुकानों और निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इन नियमों के तहत लाया गया है। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को समान अधिकार और सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
सभी कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम लागू
पहले एक निश्चित वेतन सीमा से ऊपर के कर्मचारियों को ओवरटाइम का लाभ नहीं मिलता था। लेकिन नए नियमों के तहत इस सीमा को हटा दिया गया है। अब किसी भी वेतन स्तर का कर्मचारी अगर निर्धारित समय से अधिक काम करता है, तो उसे अतिरिक्त भुगतान मिलेगा।
कंपनियों के लिए बढ़ सकती है चुनौती
इन बदलावों का असर कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है। ज्यादा वेतन वाले कर्मचारियों को भी ओवरटाइम भुगतान करना होगा, जिससे खर्च बढ़ने की संभावना है। ऐसे में कंपनियों को अपने काम के तरीके, शिफ्ट प्लानिंग और वर्कलोड मैनेजमेंट में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।
कामकाजी माहौल में संतुलन की उम्मीद
नए श्रम नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और कार्यस्थल को अधिक संतुलित बनाना बताया जा रहा है। इससे उम्मीद की जा रही है कि कर्मचारियों को उनके काम का उचित मूल्य मिलेगा और कार्य-जीवन संतुलन बेहतर हो सकेगा।



