TouristVehicleRule – अब अनिवार्य होगा 60 दिन में होम स्टेट लौटना…
TouristVehicleRule – केंद्र सरकार के नए निर्देश के तहत अब सभी टूरिस्ट वाहनों को हर 60 दिन में कम से कम एक बार अपने पंजीकरण वाले राज्य में लौटना अनिवार्य होगा। सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से 13 फरवरी को जारी अधिसूचना में यह प्रावधान जोड़ा गया है। नियम का पालन न करने पर जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले के बाद देशभर के ट्रांसपोर्टरों में असंतोष देखने को मिल रहा है और वे इसे लेकर मंत्रालय से संवाद की तैयारी कर रहे हैं।

नए प्रावधान पर ट्रांसपोर्टरों की आपत्ति
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) का कहना है कि ऑल इंडिया टूरिस्ट व्हीकल परमिट नियम-2023 में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं थी। पहले व्यवस्था यह थी कि यात्रा या तो वाहन के होम स्टेट से शुरू हो या वहीं समाप्त हो। इसके अलावा वाहन कितने समय तक दूसरे राज्यों में संचालित रहेगा, इस पर कोई समय सीमा तय नहीं थी। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल के अनुसार, हालिया अधिसूचना में 60 दिन के भीतर होम स्टेट लौटने की नई शर्त जोड़ दी गई है, जिसे एक अप्रैल से लागू किया जाएगा।
आर्थिक और परिचालन संबंधी चुनौतियां
ट्रांसपोर्ट संगठनों का तर्क है कि इस नियम से साल में कई बार खाली या आंशिक रूप से खाली वाहनों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। उनका कहना है कि इससे ईंधन की खपत बढ़ेगी और परिचालन लागत में भारी इजाफा होगा। साथ ही सड़कों पर अनावश्यक दबाव भी बढ़ सकता है। उनका अनुमान है कि साल भर में कम से कम छह बार वाहनों को पंजीकरण राज्य में ले जाना पड़ेगा, जिससे व्यवसायिक योजनाएं प्रभावित होंगी।
पुराने वाहनों पर नियम लागू करने पर सवाल
AIMTC ने यह भी मुद्दा उठाया है कि जिन वाहनों का पंजीकरण उस समय हुआ था जब ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, उन पर नया नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं है। संगठन का कहना है कि कई ट्रांसपोर्टरों ने अन्य राज्यों में वाहन इसलिए पंजीकृत कराए थे क्योंकि उस समय स्थानीय स्तर पर पंजीकरण में प्रतिबंध या तकनीकी अड़चनें थीं। उनका सुझाव है कि नए नियम को केवल भविष्य में पंजीकृत होने वाले वाहनों पर लागू किया जाए, ताकि व्यवसायी पहले से योजना बना सकें।
दिल्ली-एनसीआर के ऑपरेटरों की चिंता
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में संचालित टूरिस्ट वाहनों के मालिकों का कहना है कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच कुछ श्रेणी के वाहनों का स्थानीय पंजीकरण संभव नहीं था। इसी कारण बड़ी संख्या में वाहनों को तेलंगाना, मिजोरम, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पंजीकृत कराया गया। अब यदि हर दो महीने में इन वाहनों को वहां ले जाना अनिवार्य होगा, तो बुकिंग और सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इससे न केवल संसाधनों का अतिरिक्त उपयोग होगा, बल्कि यात्रियों की योजनाओं में भी बाधा आ सकती है।
समाधान की मांग और आगे की रणनीति
टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि वे इस विषय पर मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि व्यावहारिक कठिनाइयों को विस्तार से सामने रखा जाएगा और नियम में संशोधन की मांग की जाएगी। संगठन का दावा है कि पहले की बैठकों में मंत्रालय की ओर से सकारात्मक संकेत मिले थे। ट्रांसपोर्टरों को उम्मीद है कि उद्योग की परिस्थितियों को देखते हुए सरकार कोई संतुलित समाधान निकालेगी।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि नए नियम के लागू होने से पहले उद्योग जगत और सरकार के बीच संवाद अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय हो सकती है।



