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Influenza – बदलते मौसम में बच्चों में फ्लू का बढ़ता खतरा, जानें लक्षण और बचाव के जरूरी उपाय

Influenza – बदलते मौसम के साथ बच्चों में वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और इनमें इन्फ्लूएंजा, जिसे आमतौर पर फ्लू कहा जाता है, सबसे सामान्य संक्रमणों में शामिल है। खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है और नाक, गले तथा फेफड़ों को प्रभावित कर सांस संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकता है। नोएडा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गुप्ता के अनुसार, यदि शुरुआती चरण में सही इलाज शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश मामलों में यह बीमारी गंभीर रूप नहीं लेती।

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बच्चों में किन लक्षणों पर रखें नजर

इन्फ्लूएंजा के शुरुआती संकेत सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लग सकते हैं, लेकिन कई बार इसके लक्षण अधिक तीव्र होते हैं। बच्चे को तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में दर्द, नाक बहना या बंद होना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। छोटे बच्चों में कुछ मामलों में उल्टी या दस्त की शिकायत भी देखने को मिलती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना जाता है।

संक्रमण फैलने का तरीका

यह एक वायरल संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से आसानी से फैलता है। स्कूल, डे-केयर सेंटर और अन्य जगहों पर बच्चों का एक-दूसरे के करीब रहना संक्रमण का जोखिम बढ़ा देता है। कई बार संक्रमित बच्चे में शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन वह वायरस दूसरों तक पहुंचा सकता है। यही कारण है कि एक बच्चे से दूसरे बच्चे में संक्रमण तेजी से फैलने की संभावना बनी रहती है।

कितने समय में मिलती है राहत

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश बच्चों में इन्फ्लूएंजा के लक्षण पांच से सात दिनों के भीतर कम होने लगते हैं। इस दौरान बच्चे को पर्याप्त आराम देना, भरपूर पानी और अन्य तरल पदार्थ पिलाना जरूरी होता है। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की दवा देना उचित नहीं है। यदि बच्चे को सांस लेने में परेशानी, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, लंबे समय तक तेज बुखार बने रहना या दौरे जैसी गंभीर स्थिति दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां

विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल फ्लू का टीका लगवाना इन्फ्लूएंजा से बचाव का प्रभावी तरीका माना जाता है। इसके साथ ही बच्चों को नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना, बीमार व्यक्ति के संपर्क से बचना और बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनना भी संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद करता है। मौसम में बदलाव के दौरान थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बच्चों को कई वायरल बीमारियों से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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