PlayBasedLearning – स्क्रीन से दूरी बनाकर बच्चों को सिखाएं सीखने के नए तरीके
PlayBasedLearning– मोबाइल, टैबलेट और टीवी का बढ़ता इस्तेमाल आज बच्चों की दिनचर्या का सामान्य हिस्सा बन गया है। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से बच्चों की शारीरिक सक्रियता कम हो सकती है और उनकी एकाग्रता पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि रोजमर्रा की कुछ सरल ऑफलाइन गतिविधियां बच्चों के मानसिक विकास, रचनात्मक सोच और शारीरिक संतुलन को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती हैं। चाइल्ड साइकियाट्रिस्ट डॉ. गायत्री राठौड़ ने ऐसी कई गतिविधियों की जानकारी दी है, जिन्हें घर पर आसानी से कराया जा सकता है।

खोज वाले खेल से बढ़ सकती है सोचने की क्षमता
विशेषज्ञ के अनुसार, घर में छोटी-छोटी वस्तुएं या संकेत छिपाकर बच्चों से उन्हें खोजने के लिए कहना एक रोचक गतिविधि है। इस तरह के खेल में बच्चा सुरागों को समझने, याद रखने और सही क्रम में सोचने का अभ्यास करता है। खेल-खेल में समस्या का समाधान ढूंढ़ने की आदत विकसित होती है, जिससे उसकी याददाश्त और तार्किक क्षमता को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह गतिविधि परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा माध्यम भी बन सकती है।
पौधों की देखभाल से विकसित होती है जिम्मेदारी
यदि घर में थोड़ी भी जगह उपलब्ध हो, तो बच्चे को एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी दी जा सकती है। रोज पानी देना, पौधे की बढ़त पर नजर रखना और उसकी जरूरतों को समझना बच्चे में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रकृति से जुड़ाव बच्चों में धैर्य बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी पैदा करता है।
घर में तैयार करें आसान शारीरिक चुनौती
डॉ. गायत्री राठौड़ के मुताबिक, तकिए, कुशन और कुर्सियों जैसी घरेलू वस्तुओं की मदद से एक छोटा रास्ता तैयार किया जा सकता है, जिसे पार करने का लक्ष्य बच्चे को दिया जाए। इस गतिविधि के दौरान शरीर का संतुलन, हाथ-पैरों का तालमेल और आत्मविश्वास बेहतर होता है। साथ ही बच्चे को पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी मिलती है, जो लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को कम करने में सहायक हो सकती है।
रसोई की छोटी जिम्मेदारियां भी बन सकती हैं सीखने का जरिया
विशेषज्ञ सलाह देती हैं कि माता-पिता सुरक्षित और आसान रसोई कार्यों में बच्चों की भागीदारी बढ़ाएं। जैसे सब्जियां धोना, सामग्री गिनना, आटा मिलाने में मदद करना या बर्तन व्यवस्थित करना। इन कार्यों से बच्चों के हाथों का समन्वय बेहतर होता है और शुरुआती गणितीय समझ भी मजबूत होती है। इसके अलावा, वे धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाना सीखते हैं।
घर में बनाया गया फोर्ट बढ़ाता है रचनात्मक आत्मविश्वास
बेडशीट, तकिए और कुर्सियों की मदद से बच्चों को अपना छोटा-सा फोर्ट या खेलने की जगह तैयार करने का अवसर देना भी उपयोगी गतिविधि मानी जाती है। इस प्रक्रिया में बच्चा अपनी कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल करता है, योजना बनाता है और उपलब्ध चीजों को नए तरीके से जोड़ना सीखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की खुली रचनात्मक गतिविधियां बच्चों की कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करती हैं। साथ ही, यह स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय का एक सकारात्मक विकल्प भी बन सकती हैं।