Jannah Theme License is not validated, Go to the theme options page to validate the license, You need a single license for each domain name.
राष्ट्रीय

Abhyudaya Yojana Recruitment Scam: अयोग्य लोगों को बांटी गई 60 हजार की सैलरी, असीम अरुण के कड़े तेवर देख आउटसोर्सिंग कंपनियों में हड़कंप

Abhyudaya Yojana Recruitment Scam: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली कोचिंग अब विवादों के घेरे में आ गई है। कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती में हुए बड़े फर्जीवाड़े ने शासन की (outsourcing company scandal) को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। सरकार की इस योजना का मकसद गरीब और मेधावी छात्रों को मुफ्त शिक्षा देना था, लेकिन भर्ती में हुई गड़बड़ी ने इस नेक काम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Abhyudaya Yojana Recruitment Scam
Abhyudaya Yojana Recruitment Scam

मंत्री असीम अरुण ने दिए जांच के सख्त आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए समाज कल्याण विभाग के मंत्री असीम अरुण ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली (government job investigation) अब पूरी गहराई तक जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। समाज कल्याण विभाग ने अब आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे गए सभी कर्मचारियों के दस्तावेजों की पुन: जांच के लिए औपचारिक पत्र लिखकर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कंप्यूटर ऑपरेटरों और प्रोग्रामरों की भर्ती पर लटकी तलवार

जांच का दायरा केवल कोर्स कोआर्डिनेटरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अब आउटसोर्सिंग पर रखे गए 460 कर्मियों की नियुक्ति भी संदेह के घेरे में है। इसमें 300 कंप्यूटर ऑपरेटर और कई (programmer recruitment audit) शामिल हैं, जिनकी योग्यता और चयन प्रक्रिया को अब दोबारा खंगाला जाएगा। विभाग यह देखना चाहता है कि क्या इन नियुक्तियों में भी वास्तविक योग्यता को दरकिनार कर चहेतों को जगह दी गई है।

आश्रम पद्धति स्कूलों और मंडलीय कार्यालयों में मची खलबली

भर्तियों का यह जाल केवल कोचिंग सेंटर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि आश्रम पद्धति स्कूलों और छात्रवृत्ति योजनाओं के मंडलीय कार्यालयों तक फैला हुआ था। आईटी कार्यों के लिए रखे गए (contractual staff hiring) की अर्हता अब जांची जाएगी कि क्या वे निर्धारित मानकों को पूरा करते थे। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चयन के लिए बनी कमेटियों ने नियमों का पालन किया था या वे भी इस खेल में शामिल थीं।

भारी-भरकम वेतन और अयोग्य उम्मीदवारों की फौज

आंकड़े बताते हैं कि इस घोटाले में सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की गई है। कंप्यूटर प्रोग्रामर जैसे पदों पर 60 हजार रुपये और कंप्यूटर ऑपरेटरों को 18 हजार रुपये का (monthly honorarium payment) दिया जा रहा था। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को भी 10 हजार रुपये के साथ पीएफ जैसी सुविधाएं मिल रही थीं। इतनी मोटी तनख्वाह के बावजूद अगर कर्मचारी अयोग्य पाए जाते हैं, तो यह सरकारी खजाने पर एक बड़ा डाका माना जाएगा।

पीसीएस मुख्य परीक्षा की अनिवार्यता को दिखाया ठेंगा

अभ्युदय कोचिंग में कोर्स कोआर्डिनेटर के 69 पदों पर हुई भर्ती में सबसे बड़ा खेल देखने को मिला। नियमानुसार इन पदों के लिए (PCS mains qualification) अनिवार्य थी, ताकि छात्रों को सही मार्गदर्शन मिल सके। लेकिन जांच में पता चला कि 48 अभ्यर्थी ऐसे थे जो इस योग्यता को पूरा ही नहीं करते थे। इसके बावजूद उन्हें न केवल नियुक्त किया गया, बल्कि दो साल तक उन्हें भारी वेतन का भुगतान भी किया गया।

दो साल तक सरकारी खजाने से ली मुफ्त की सैलरी

अयोग्य पाए गए ये 48 कोआर्डिनेटर पिछले दो वर्षों से हर महीने 60 हजार रुपये का मानदेय डकार रहे थे। यह (irregular salary disbursement) न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन हजारों योग्य युवाओं के साथ धोखा है जो दिन-रात पीसीएस परीक्षाओं के लिए मेहनत कर रहे हैं। समाज कल्याण विभाग अब उन दस्तावेजों को खंगाल रहा है जिनके आधार पर इन लोगों को क्लीन चिट दी गई थी।

आईटी सेक्टर और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की नियुक्तियों का सच

जांच टीम अब मल्टी टास्किंग सर्विसेज (MTS) के तहत रखे गए 150 कर्मियों की फाइलों को भी कब्जे में ले रही है। (outsourcing workforce management) के नाम पर कंपनियों ने किस तरह से नियुक्तियां कीं और क्या इसमें कोई बड़ी घूसखोरी हुई है, इसकी परतें अब खुलना शुरू हो गई हैं। मंडलीय कार्यालयों में आईटी कार्यों के लिए नियुक्त लोगों की तकनीकी क्षमता का भी अब परीक्षण किया जा सकता है।

चयन समितियों की भूमिका पर खड़े हुए गंभीर सवाल

किसी भी सरकारी भर्ती के लिए बाकायदा कमेटियां गठित की जाती हैं, जिनकी जिम्मेदारी नियमों का कड़ाई से पालन कराना होता है। लेकिन इस मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि (selection committee oversight) पूरी तरह विफल रही। अब उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जा रही है जिन्होंने इन अयोग्य लोगों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए और दो साल तक इनकी धांधली को नजरअंदाज किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति का परीक्षण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं और इस मामले में उनकी सरकार की साख दांव पर लगी है। जिस तरह (social welfare department) अब सक्रिय हुआ है, उससे उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई होगी। आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ भी ब्लैकलिस्ट करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो।

भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव के संकेत

इस प्रकरण के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार आउटसोर्सिंग भर्ती की पूरी व्यवस्था को ही बदलने पर विचार कर रही है। अब (transparent recruitment process) को लागू करने के लिए जेम पोर्टल और अन्य पारदर्शी माध्यमों को और अधिक सख्त बनाने की योजना है। छात्रों और बेरोजगार युवाओं को अब उम्मीद है कि जांच के बाद वास्तविक योग्य लोगों को ही इन महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का अवसर मिलेगा।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.