राष्ट्रीय

AssemblySpeaker – रतिंद्र बोस बने बंगाल विधानसभा के नए अध्यक्ष

AssemblySpeaker – पश्चिम बंगाल की 18वीं विधानसभा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के विधायक रतिंद्र बोस को निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुना गया। राज्य की संसदीय राजनीति में यह फैसला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि आजादी के बाद पहली बार उत्तर बंगाल से किसी विधायक को विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है।

rathindra bose bengal assembly speaker

विधानसभा में उनके नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से रखा गया। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने सदन की प्रक्रिया पूरी कराई और ध्वनि मत से रतिंद्र बोस के निर्वाचन की घोषणा की गई। सदन में मौजूद भाजपा विधायकों ने एकमत होकर उनका समर्थन किया।

तृणमूल कांग्रेस ने नहीं उतारा उम्मीदवार

विपक्ष में बैठी तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा। इसके चलते रतिंद्र बोस का निर्वाचन निर्विरोध हो गया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि विधानसभा में भाजपा के स्पष्ट बहुमत को देखते हुए विपक्ष ने मुकाबले से दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा।

294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को हालिया चुनावों में बड़ी सफलता मिली है और पार्टी के पास 207 विधायक हैं। इसी वजह से रतिंद्र बोस का अध्यक्ष चुना जाना पहले से लगभग तय माना जा रहा था। पार्टी ने एक दिन पहले ही उनके नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी थी।

जिम्मेदारी निभाने का दिया भरोसा

निर्वाचन के बाद विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रतिंद्र बोस ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ निभाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि संसदीय परंपराओं को बनाए रखने के लिए वे वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों से मार्गदर्शन भी लेते रहेंगे।

अध्यक्ष पद संभालने से पहले उन्होंने कहा कि उनका प्रयास सदन को सुचारु रूप से चलाने और सभी पक्षों को साथ लेकर काम करने का रहेगा। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की बात भी कही।

उत्तर बंगाल को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व

रतिंद्र बोस कूचबिहार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनके विधानसभा अध्यक्ष बनने को उत्तर बंगाल के लिए एक बड़े राजनीतिक प्रतिनिधित्व के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार बनकर उभरा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर बंगाल में पार्टी की मजबूत पकड़ को देखते हुए यह नियुक्ति एक रणनीतिक संदेश भी देती है। इससे क्षेत्रीय नेतृत्व को महत्व देने और स्थानीय राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश दिखाई देती है।

विधानसभा संचालन पर रहेंगी नजरें

नई विधानसभा के गठन के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि अध्यक्ष के तौर पर रतिंद्र बोस सदन की कार्यवाही को किस तरह संचालित करते हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से तीखे राजनीतिक टकराव के लिए जानी जाती रही है। ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका और भी अहम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संतुलन बनाए रखना विधानसभा अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, रतिंद्र बोस ने अपने शुरुआती बयान में निष्पक्षता और संवाद को प्राथमिकता देने के संकेत दिए हैं।

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