उत्तराखण्ड

UCCLaw – उत्तराखंड में अब यूसीसी के तहत सीधे दर्ज होंगे मुकदमे

UCCLaw – उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद अब उससे जुड़े मामलों में पुलिस सीधे यूसीसी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर सकेगी। राज्य के अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) पोर्टल पर यूसीसी से संबंधित सभी प्रावधानों को तकनीकी रूप से जोड़ दिया गया है। इससे अब पुलिस को मुकदमा दर्ज करते समय अलग-अलग कानूनों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

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तकनीकी बदलाव के बाद आसान हुई प्रक्रिया

राज्य में यूसीसी लागू होने के शुरुआती दौर में पुलिस को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाने में दर्ज एक मामले ने इस समस्या को सामने ला दिया था। चार अप्रैल को दर्ज हुए उस प्रकरण में हलाला और तीन तलाक से जुड़े आरोप थे, लेकिन उस समय सीसीटीएनएस पोर्टल पर यूसीसी की धाराएं उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में पुलिस ने दहेज प्रतिषेध अधिनियम, मुस्लिम महिला अधिकार संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

बाद में जब यह मामला शासन स्तर तक पहुंचा तो सिस्टम में आवश्यक बदलाव किए गए। अब यूसीसी से जुड़ी धाराएं पूरी तरह पोर्टल पर सक्रिय कर दी गई हैं, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों की कानूनी प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और तेज हो सकेगी।

चार्जशीट में जोड़ी गईं नई धाराएं

तकनीकी अपडेट के बाद पुलिस ने संबंधित मामले में जांच पूरी कर ऑनलाइन चार्जशीट दाखिल की। इस दौरान आरोपियों पर यूसीसी की धारा 32(1)(2) और 32(1)(3) भी लगाई गईं। अधिकारियों का कहना है कि अब आगे दर्ज होने वाले मामलों में शुरुआत से ही यूसीसी की धाराओं का इस्तेमाल किया जाएगा।

पुलिस विभाग के मुताबिक इससे केस की सुनवाई और दस्तावेजी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। पहले जहां अलग-अलग कानूनों के प्रावधानों का सहारा लेना पड़ता था, अब यूसीसी के तहत एक समान कानूनी ढांचा उपलब्ध रहेगा।

महिलाओं में बढ़ा भरोसा

यूसीसी लागू होने के बाद कई महिलाओं ने इसे राहत देने वाला कदम बताया है। रुड़की की एक पीड़िता ने कहा कि लंबे समय से सामाजिक दबाव और कानूनी जटिलताओं से जूझ रही महिलाओं को अब न्याय की उम्मीद दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि हलाला और तीन तलाक जैसी परिस्थितियों में अब महिलाओं को कानूनी संरक्षण पहले से ज्यादा मजबूत मिलेगा।

पीड़िता ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और एक महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया।

उत्तराखंड बना पहला राज्य

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे लागू करने का वादा किया था। सरकार बनने के बाद विशेषज्ञ समिति गठित की गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विधेयक तैयार हुआ और बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया गया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक यूसीसी पोर्टल पर 4.39 लाख से अधिक विवाह पंजीकरण दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा 351 विवाह विच्छेद के मामले और 84 लिव-इन संबंधों का पंजीकरण भी हुआ है। कुछ मामलों में लिव-इन संबंध समाप्त होने की जानकारी भी पोर्टल पर दर्ज कराई गई है।

पुलिस मुख्यालय ने दी जानकारी

पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता सुनील मीणा ने बताया कि शुरुआती चरण में तकनीकी कारणों से यूसीसी की सभी धाराएं सीसीटीएनएस पर उपलब्ध नहीं थीं। अब पूरा सिस्टम अपडेट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यूसीसी से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज करते समय ही संबंधित धाराएं सीधे जोड़ी जा सकेंगी।

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