राष्ट्रीय

ConsumerRights – कैरी बैग शुल्क मामले में ग्राहक के पक्ष में आया फैसला

ConsumerRights – हरियाणा के रोहतक में एक फुटवियर शोरूम से जूते खरीदने वाले ग्राहक को कैरी बैग के लिए अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ी थी। इसी शुल्क को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उपभोक्ता आयोग के फैसले के साथ समाप्त हुआ है। आयोग ने माना कि ग्राहक से बैग के लिए अलग से पैसे लेना उचित नहीं था और संबंधित कंपनी को न केवल वह राशि लौटाने बल्कि मुआवजा और कानूनी खर्च का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।

consumer rights carry bag fee verdict

यह मामला करीब तीन वर्ष तक कानूनी प्रक्रिया में रहा, जिसके बाद उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में निर्णय सुनाया। फैसले ने उपभोक्ता अधिकारों और व्यापारिक व्यवहार से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को फिर से चर्चा में ला दिया है।

खरीदारी के दौरान वसूला गया था अतिरिक्त शुल्क

मामले के अनुसार, अप्रैल 2023 में रोहतक निवासी एक युवक ने एक प्रतिष्ठित फुटवियर ब्रांड के आउटलेट से जूते खरीदे थे। खरीदारी के समय बिल में कैरी बैग के लिए अलग से 10 रुपये जोड़े गए। ग्राहक ने इस शुल्क पर आपत्ति जताई और बिना अतिरिक्त भुगतान के बैग देने की मांग की, लेकिन स्टोर कर्मचारियों ने कंपनी की नीति का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया।

इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता मंच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि सामान खरीदने के बाद उसे ले जाने के लिए आवश्यक व्यवस्था करना विक्रेता की जिम्मेदारी है और इसके लिए अलग से शुल्क लेना अनुचित है।

कंपनी ने पर्यावरण संरक्षण का दिया तर्क

सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से यह दलील दी गई कि कैरी बैग पर शुल्क लगाने का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। कंपनी का कहना था कि इससे ग्राहकों को अपने बैग साथ लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे अनावश्यक बैग उपयोग कम हो सकता है।

कंपनी ने यह भी कहा कि बैग खरीदना ग्राहकों के लिए अनिवार्य नहीं था और यह पूरी तरह उनकी इच्छा पर निर्भर था। साथ ही यह तर्क भी रखा गया कि बैग पर किसी प्रकार की ब्रांडिंग नहीं थी, इसलिए इसे प्रचार गतिविधि से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

ग्राहक पक्ष ने सेवा की जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया

ग्राहक की ओर से पेश पक्ष ने आयोग के समक्ष कहा कि किसी भी विक्रेता का दायित्व है कि वह खरीदे गए उत्पाद को ग्राहक को ऐसी स्थिति में उपलब्ध कराए जिससे उसे ले जाना संभव हो। उनका तर्क था कि कैरी बैग जैसी सुविधा व्यापारिक सेवा का हिस्सा मानी जानी चाहिए और इसका खर्च ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए।

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि अतिरिक्त शुल्क वसूलना उपभोक्ता हितों के विपरीत है और इससे ग्राहकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है।

आयोग ने माना अनुचित व्यापार व्यवहार

उपभोक्ता आयोग की पीठ ने उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों का अध्ययन करने के बाद निर्णय सुनाया। आयोग ने पाया कि मामले में ग्राहक की शिकायत उचित है और कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क लेना सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।

फैसले में कंपनी को 10 रुपये की राशि वापस करने के साथ कुल 8,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। इसमें मुआवजा और कानूनी खर्च दोनों शामिल हैं। आयोग ने निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान करने का आदेश भी दिया।

उपभोक्ता जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण संकेत

यह फैसला बताता है कि उपभोक्ता अधिकार केवल बड़ी रकम वाले मामलों तक सीमित नहीं हैं। छोटी राशि से जुड़े विवाद भी महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न खड़े कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ग्राहकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और आवश्यकता पड़ने पर उचित मंच का उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगा।

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