CorporateCase – नासिक में टीसीएस विवाद में नए आरोपों से जांच तेज
CorporateCase – नासिक स्थित टीसीएस कार्यालय से जुड़े विवाद में अब नए आरोप सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। एक और महिला कर्मचारी ने आगे आकर दावा किया है कि दफ्तर के भीतर युवतियों को निशाना बनाने का एक सुनियोजित तरीका अपनाया जा रहा था। पुलिस भी अपनी जांच में यह संकेत दे चुकी है कि आरोपी अलग-अलग नहीं, बल्कि एक संगठित समूह की तरह काम कर रहे थे। अब तक धर्मांतरण के प्रयास और यौन उत्पीड़न से जुड़े कुल नौ मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे पूरे प्रकरण ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।

अलग-थलग बैठाकर काम कराने के आरोप
करीब छह साल तक कंपनी में कार्यरत रही एक पूर्व महिला कर्मचारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नासिक में ट्रांसफर के बाद उन्हें मुख्य कार्यालय से अलग-थलग कर दिया गया था। उनका कहना है कि उन्हें एक अलग स्थान, यहां तक कि छत पर बैठकर काम करने के लिए बाध्य किया गया। इस दौरान उनके व्यक्तिगत सामान जैसे मोबाइल फोन और बैग को भी कई बार अपने पास रखने की अनुमति नहीं दी जाती थी। यह व्यवस्था उन्हें असहज और असुरक्षित महसूस कराती थी।
निजी सामान जब्त करने की बात भी सामने आई
महिला कर्मचारी के अनुसार, जब भी वह किसी काम से नीचे आती थीं, तो सुरक्षा या अन्य कारणों का हवाला देकर उनका मोबाइल और अन्य निजी वस्तुएं ले ली जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल उनके साथ नहीं, बल्कि कई अन्य युवा कर्मचारियों के साथ भी ऐसा व्यवहार किया जाता था। उनका कहना है कि दफ्तर के भीतर एक ऐसा माहौल था, जहां कर्मचारियों को दबाव में रखा जाता था और शिकायत करने की हिम्मत तक नहीं होती थी।
युवा महिला कर्मचारियों को आसान लक्ष्य मानने का दावा
पूर्व कर्मचारी ने यह भी कहा कि 20 से 25 वर्ष की उम्र की महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता था। उनके मुताबिक, आरोपियों को लगता था कि इस आयु वर्ग की महिलाएं आसानी से दबाव में आ सकती हैं और उनके खिलाफ आवाज उठाने से बचेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्यतः कर्मचारी अपनी शिकायत एचआर विभाग के पास ले जाते हैं, लेकिन यहां स्थिति अलग थी। उनके अनुसार, एचआर विभाग के भीतर भी डर का माहौल था, जिससे पीड़ितों को कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाती थी।
पुलिस जांच में संगठित गिरोह का संकेत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि सात पुरुष आरोपी मिलकर एक समूह के रूप में काम कर रहे थे और महिला कर्मचारियों को निशाना बना रहे थे। नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने बताया कि मामले में दो महिला कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इनमें से एक ऑपरेशन और एचआर प्रमुख रही महिला पर आरोप है कि उसने एक पीड़िता को शिकायत दर्ज कराने से हतोत्साहित किया। दूसरी महिला आरोपी फिलहाल फरार बताई जा रही है।
एसआईटी गठित, कई शिकायतों की जांच जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस सप्ताह एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। यह टीम आठ महिला कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों की जांच कर रही है। इन शिकायतों में मानसिक और यौन उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि एचआर विभाग ने समय रहते इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई।
गिरफ्तारियां और आरोपियों की पहचान
अब तक पुलिस इस मामले में आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें सात पुरुष और एक महिला ऑपरेशन मैनेजर शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, एक अन्य महिला आरोपी अभी गिरफ्त से बाहर है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और शाहरुख शेख के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।



