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MovieReview – नेटफ्लिक्स पर रिलीज ‘टोस्टर’ में डार्क कॉमेडी का फीका असर

MovieReview – नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा की फिल्म ‘टोस्टर’ ने दर्शकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया हासिल की है। निर्देशक विवेक दासचौधरी की यह डार्क कॉमेडी शुरुआत में दिलचस्प लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसकी रफ्तार और पकड़ कमजोर पड़ती नजर आती है। करीब दो घंटे पांच मिनट लंबी इस फिल्म में सस्पेंस का तत्व जरूर मौजूद है, मगर उसे प्रभावी तरीके से पेश नहीं किया जा सका। यही वजह है कि फिल्म कई जगह खिंची हुई महसूस होती है।

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कहानी में कंजूसी से शुरू होता है उलझनों का सिलसिला

फिल्म की कहानी रमाकांत नाम के एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बेहद कंजूस स्वभाव का है। उसकी यह आदत न सिर्फ उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है, बल्कि उसकी शादीशुदा जिंदगी में भी तनाव पैदा करती है। उसकी पत्नी उसकी इस आदत को एक तरह की मानसिक समस्या मानती है, लेकिन रमाकांत खुद इसे गंभीरता से नहीं लेता। कहानी तब मोड़ लेती है, जब एक मामूली-सा टोस्टर उसकी जिंदगी में बड़ी उथल-पुथल का कारण बन जाता है और वह अनचाही घटनाओं में उलझ जाता है।

डार्क कॉमेडी का असर क्यों नहीं बना पाती पकड़

डार्क कॉमेडी जैसे जॉनर में संतुलन बनाना आसान नहीं होता, और ‘टोस्टर’ इसी मोर्चे पर कमजोर पड़ती दिखती है। फिल्म की शुरुआत भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में दर्शकों को बांधती है, लेकिन बाद में कहानी की गति धीमी हो जाती है। हास्य और सस्पेंस का मेल उतना प्रभावी नहीं बन पाता, जितनी उम्मीद की जाती है। यही कारण है कि जो दर्शक इस जॉनर की मजबूत फिल्मों के आदी हैं, उन्हें यह फिल्म साधारण लग सकती है।

कलाकारों की एक्टिंग फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी

जहां कहानी कमजोर पड़ती है, वहीं कलाकारों का प्रदर्शन फिल्म को संभालने की कोशिश करता है। राजकुमार राव ने अपने किरदार में सहजता दिखाई है, जबकि सान्या मल्होत्रा भी अपने रोल में प्रभाव छोड़ती हैं। अर्चना पूरन सिंह का किरदार खास तौर पर ध्यान खींचता है। उनका अंदाज कई जगह पुराने कॉमिक किरदारों की याद दिलाता है और फिल्म में कुछ राहत भरे पल जोड़ता है।

सपोर्टिंग कास्ट और कैमियो से मिलती है हल्की राहत

फिल्म में फराह खान की मौजूदगी भले ही सीमित हो, लेकिन उनके स्क्रीन पर आते ही माहौल थोड़ा हल्का हो जाता है। उनका छोटा-सा रोल भी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने में कामयाब रहता है। कुल मिलाकर, सपोर्टिंग कास्ट फिल्म को कुछ हद तक संभालती है, हालांकि यह पूरी तरह फिल्म को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

फिल्म को लेकर सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी अलग-अलग राय सामने आई हैं। कई दर्शकों ने इसे उबाऊ बताते हुए समय की बर्बादी तक कह दिया, तो कुछ ने इसके डायलॉग्स और अलग कहानी की तारीफ भी की है। कुछ यूजर्स का मानना है कि फिल्म का पहला हिस्सा ठीक-ठाक है, लेकिन दूसरा हिस्सा उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। वहीं कुछ दर्शकों ने इसे एक बार देखने लायक बताया है।

क्या यह फिल्म वीकेंड के लिए सही विकल्प है?

अगर आप हल्की-फुल्की डार्क कॉमेडी के साथ समय बिताना चाहते हैं और ज्यादा उम्मीदें नहीं रखते, तो ‘टोस्टर’ एक औसत विकल्प हो सकती है। लेकिन अगर आप इस जॉनर में कुछ नया और दमदार देखने की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।

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