Delimitation – लोकसभा सीटों के विस्तार और महिला आरक्षण पर सरकार का नया खाका तैयार
Delimitation – लोकसभा की सीटों में संभावित बढ़ोतरी और महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इस प्रक्रिया में विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों की उन आशंकाओं को ध्यान में रखा जा रहा है, जो भविष्य में होने वाले परिसीमन से जुड़ी हुई हैं।

दक्षिणी राज्यों की चिंताओं पर मंथन
परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के कई राज्यों ने पहले भी चिंता जताई है कि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से संसद में उनका प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ऐसे विकल्पों का अध्ययन कर रही है, जिनसे राज्यों के बीच वर्तमान राजनीतिक संतुलन को बनाए रखा जा सके। बताया जा रहा है कि इसी उद्देश्य से नए मसौदे में पुराने अनुपात को सुरक्षित रखने का सुझाव भी शामिल किया गया है।
सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव
सरकारी स्तर पर जिन प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है, उनमें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 तक करने का विकल्प भी शामिल बताया जा रहा है। इससे बढ़ती आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और विभिन्न पहलुओं पर विचार जारी है।
परिसीमन का आधार क्या होगा
सूत्रों के मुताबिक, नए प्रस्ताव में राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात 1971 की जनगणना के आधार पर बनाए रखने का विचार सामने आया है। वहीं, लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किए जाने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि वर्तमान जनगणना की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान तलाशना है।
संसद में संख्या बल भी अहम
सरकार इस संशोधन को संसद में तभी लाना चाहती है, जब उसे आवश्यक संवैधानिक समर्थन मिलने का भरोसा हो। संविधान संशोधन पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। मौजूदा लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास करीब 300 सांसद हैं, जबकि संविधान संशोधन के लिए इससे अधिक समर्थन की आवश्यकता होगी। इसी वजह से विधेयक पेश करने के समय को लेकर भी रणनीति बनाई जा रही है।
महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी
वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुसार महिला आरक्षण का क्रियान्वयन आगामी परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है, जिससे इसके 2034 से पहले लागू होने की संभावना सीमित मानी जाती है। सरकार चाहती है कि यदि आवश्यक संवैधानिक बदलाव हो जाएं तो 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता तैयार किया जा सके। इसके लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
पहले के मसौदे में क्या था
इस वर्ष पहले प्रस्तुत किए गए संविधान संशोधन प्रस्ताव में लोकसभा के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया था। प्रस्ताव के अनुसार महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आवंटन अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में क्रमवार तरीके से किया जाएगा, ताकि आरक्षण का लाभ विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच सके। फिलहाल सरकार सभी विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है और अंतिम निर्णय आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।