उत्तर प्रदेश

LegalCase – स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर अदालत पहुंचा मामला, परिवाद दर्ज…

LegalCase – उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य की एक टिप्पणी को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है। भगवान श्रीराम, राम मंदिर और भगवान हनुमान से जुड़ी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में पीलीभीत की एमपी-एमएलए कोर्ट में उनके खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। अदालत ने मामले को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की है।

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गाजीपुर के कार्यक्रम का हवाला देकर दायर हुआ परिवाद

यह परिवाद ज्वालामुखी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी की ओर से दाखिल किया गया है। याचिका में कहा गया है कि 23 जून को गाजीपुर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान श्रीराम, राम मंदिर और भगवान हनुमान के अस्तित्व को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से अनुचित बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों पर प्रसारित होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर आपत्ति जताई।

अदालत ने सुनवाई के लिए तय की अगली तारीख

एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी सतीश कुमार ने परिवाद दर्ज करने के बाद मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की है। परिवाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष पंकज शर्मा, राष्ट्रीय हनुमान दल के अध्यक्ष अमित गुप्ता और युवा जागृति परिषद के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी को गवाह बनाया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता संतराम राठौर के अनुसार, यह परिवाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत प्रस्तुत किया गया है।

राम मंदिर चढ़ावे पर बयान के बाद बढ़ा विवाद

हाल के दिनों में स्वामी प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि मंदिर में हुई घटना को रोका नहीं जा सका तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं। उनके इसी बयान के कुछ अंश व्यापक रूप से चर्चा में आए और विभिन्न मंचों पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई। बयान के बाद कई धार्मिक संगठनों और संत समाज के प्रतिनिधियों ने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

संत समाज और धार्मिक संगठनों ने जताई नाराजगी

हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास ने स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी धर्म की आस्था से जुड़े विषयों पर संयमित भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करते हैं। कई अन्य धार्मिक संगठनों ने भी इस मामले में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

रासुका के तहत कार्रवाई की भी उठी मांग

इस विवाद से पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के प्रमुख हिंदू पक्षकार दिनेश शर्मा फलाहारी भी स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा था कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर बार-बार दिए जा रहे विवादित बयानों से बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में भी धार्मिक ग्रंथों और देवी-देवताओं को लेकर दिए गए बयानों पर विवाद हो चुका है। फिलहाल पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत की निगरानी में जारी रहेगी।

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