ElectionResults – पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों से पहले एग्जिट पोल पर बढ़ी चर्चा
ElectionResults – पश्चिम बंगाल समेत देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सोमवार को घोषित होने वाले हैं। मतगणना शुरू होने से पहले राजनीतिक हलकों में एग्जिट पोल और चुनावी आकलनों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में इस बार Axis My India द्वारा एग्जिट पोल जारी नहीं किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के बाद कई एजेंसियों ने अपने अनुमान सार्वजनिक किए थे, जिनमें भाजपा को बढ़त मिलने के संकेत दिए गए थे, लेकिन Axis My India ने बंगाल के लिए आंकड़े जारी करने से इनकार कर दिया था।

सर्वे जारी न करने पर कंपनी की सफाई
Axis My India के प्रबंध निदेशक प्रदीप गुप्ता ने पहले संकेत दिए थे कि उनकी टीम सर्वे के सैंपल साइज को बढ़ाने के बाद 30 अप्रैल को आंकड़े जारी करेगी। हालांकि बाद में उन्होंने साफ कर दिया कि इस बार पश्चिम बंगाल के लिए उनकी कंपनी कोई एग्जिट पोल सार्वजनिक नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में फेस-टू-फेस सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राजनीतिक पसंद जाहिर करने से परहेज किया। उनके अनुसार, लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोगों ने सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जिससे विश्वसनीय डेटा तैयार करना मुश्किल हो गया।
युवाओं के रुझान पर बड़ा संकेत
मतगणना से ठीक पहले एक डिजिटल इंटरव्यू में प्रदीप गुप्ता ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर कुछ अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग बदलाव की इच्छा रखता दिखाई दिया। उनके मुताबिक 40 वर्ष से कम उम्र के मतदाताओं में सत्ता परिवर्तन को लेकर उत्सुकता देखी गई, जबकि 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का झुकाव अपेक्षाकृत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर बना रहा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी युवा मतदाता एक जैसी राय नहीं रखते, लेकिन सर्वे में मिले संकेतों से यह जरूर पता चला कि आधे से अधिक युवा मतदाता बदलाव को लेकर सकारात्मक सोच रखते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ग का मतदान व्यवहार चुनावी नतीजों पर प्रभाव डाल सकता है।
सरकार के कामकाज पर मिश्रित प्रतिक्रिया
प्रदीप गुप्ता ने अपने आकलन में यह भी कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं और सेवाओं की डिलीवरी को लेकर कुछ असंतोष देखने को मिला। हालांकि उन्होंने इसे बहुत गंभीर एंटी-इनकंबेंसी नहीं बताया। उनके अनुसार, ममता बनर्जी सरकार करीब 15 वर्षों से सत्ता में है और इतने लंबे कार्यकाल के बाद सामान्य तौर पर जितनी नाराजगी देखने को मिलती है, उसकी तुलना में स्थिति नियंत्रण में दिखाई दी।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि बड़ी संख्या में लोग अब भी राज्य सरकार के कामकाज और मुख्यमंत्री के वादों पर भरोसा जता रहे हैं। यही कारण है कि चुनावी मुकाबला कई सीटों पर बेहद करीबी माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के रुझान में भी इस बार अंतर देखने को मिला है।
भाजपा के प्रदर्शन को लेकर अनुमान
भाजपा के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए प्रदीप गुप्ता ने कहा कि पार्टी 2021 विधानसभा चुनाव की तुलना में बेहतर परिणाम हासिल कर सकती है। हालांकि उन्होंने सीटों की सटीक संख्या बताने से परहेज किया। उनका कहना था कि भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी संभव है, लेकिन यह बढ़त कितनी बड़ी होगी, इसका अनुमान लगाना फिलहाल कठिन है।
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर पूरे देश की नजर बनी हुई है क्योंकि यह मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें मतगणना के अंतिम आंकड़ों पर टिकी हैं, जो राज्य की अगली राजनीतिक दिशा तय करेंगे।