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राष्ट्रीय

EnergyShift – पीएनजी अपनाने से 6000 उपभोक्ताओं ने छोड़ा एलपीजी कनेक्शन

EnergyShift – सरकार द्वारा पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच एक अहम बदलाव सामने आया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार तक करीब 6000 उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से अपने एलपीजी कनेक्शन वापस कर दिए हैं। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब सरकार गैस वितरण प्रणाली को संतुलित करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। मंत्रालय का मानना है कि इस पहल से उन इलाकों में एलपीजी की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी, जहां अभी पाइपलाइन सुविधा नहीं पहुंच पाई है।

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उपभोक्ताओं को सराहना और सहयोग की अपील

इस पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उपभोक्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पीएनजी उपलब्ध होने के बावजूद एलपीजी कनेक्शन छोड़ा है, उन्होंने एक जिम्मेदार कदम उठाया है। साथ ही उन्होंने अन्य पीएनजी उपभोक्ताओं से भी अपील की कि वे इसी तरह सहयोग करें, ताकि सीमित संसाधनों का सही वितरण हो सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि जिन घरों तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वे एलपीजी पर निर्भरता कम करें और पीएनजी को अपनाएं।

तीन महीने बाद एलपीजी सप्लाई पर असर संभव

सरकार की योजना के तहत उन घरों में एलपीजी आपूर्ति बंद की जा सकती है जहां पीएनजी नेटवर्क मौजूद है लेकिन उपभोक्ताओं ने अभी तक इसका उपयोग शुरू नहीं किया है। इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए लगभग तीन महीने का समय दिया जाएगा। हालांकि, यह नियम उन क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा जहां तकनीकी कारणों से पीएनजी उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे मामलों में अधिकृत एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक होगा।

आयात बाधाओं के बीच रणनीतिक बदलाव

पश्चिम एशिया से एलपीजी आयात में आ रही चुनौतियों के कारण आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने रणनीतिक बदलाव करते हुए पाइपलाइन वाले क्षेत्रों में पीएनजी को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इससे वहां उपयोग हो रही एलपीजी को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकेगा, जहां अभी गैस पाइपलाइन का नेटवर्क विकसित नहीं हो पाया है।

गैस वितरण में प्राथमिकता तय

वर्तमान हालात को देखते हुए गैस आपूर्ति को अलग-अलग क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया है। घरेलू उपयोग के लिए पीएनजी और परिवहन क्षेत्र के लिए सीएनजी को पूरी मात्रा में गैस दी जा रही है। वहीं, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत ही उपलब्ध कराया जा रहा है। उर्वरक उद्योग को 70 से 75 प्रतिशत क्षमता के अनुसार गैस मिल रही है, जबकि कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो मंगाए जा रहे हैं।

एलपीजी सप्लाई सामान्य, कालाबाजारी पर कार्रवाई

हालांकि वैश्विक परिस्थितियों का असर एलपीजी सप्लाई पर पड़ा है, लेकिन सरकार का दावा है कि घरेलू वितरण व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। प्रतिदिन करीब 55 लाख सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है और कहीं से भी बड़े स्तर पर कमी की सूचना नहीं है। कमर्शियल उपयोग के लिए गैस सप्लाई भी धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट रही है, जिसमें होटल, रेस्तरां और खाद्य उद्योग को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। हाल के दिनों में करीब 2900 छापेमारी कर लगभग 1000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

पीएनजी विस्तार और कंपनियों की पहल

पीएनजी नेटवर्क के विस्तार को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। केवल मार्च महीने में ही करीब 2.9 लाख नए कनेक्शन जोड़े गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस, महानगर गैस, गेल गैस और बीपीसीएल जैसी कंपनियां उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए विभिन्न तरह के प्रोत्साहन दे रही हैं। इनमें कनेक्शन शुल्क में छूट और आसान इंस्टॉलेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जिससे अधिक से अधिक लोग इस दिशा में कदम बढ़ा सकें।

सरकार ने अफवाहों से बचने की दी सलाह

केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे निगरानी व्यवस्था को मजबूत करें और गैस से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाएं। साथ ही जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें। सरकार का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

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