HindonRiver – हिंडन नदी के पुनर्जीवन को लेकर विशेषज्ञों ने तैयार किया रोडमैप
HindonRiver – उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों में शामिल हिंडन नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर मेरठ में ‘हिंडन मंथन 2026’ का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन और भारतीय नदी परिषद की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने किया। इसमें वैज्ञानिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर नदी के संरक्षण के लिए सुझाव दिए।

विशेषज्ञों ने रखे अपने सुझाव
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने हिंडन नदी की वर्तमान स्थिति, प्रदूषण नियंत्रण और जल प्रवाह को बेहतर बनाने पर अपने विचार साझा किए। भारतीय नदी परिषद के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक रमन कांत त्यागी ने बताया कि तकनीकी सत्र में प्राप्त सभी सुझावों को संकलित कर एक विस्तृत दस्तावेज तैयार किया जाएगा। इस रिपोर्ट को ‘मेरठ डॉक्यूमेंट’ के नाम से प्रदेश सरकार को सौंपने की योजना है, ताकि नदी के पुनर्जीवन के लिए आवश्यक सहयोग और संसाधनों पर विचार किया जा सके।
प्रदूषण और अतिक्रमण बनी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, हिंडन नदी इस समय जल की कमी, प्रदूषण और अतिक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों को दूषित पानी, जलजनित बीमारियों, दुर्गंध और कृषि पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वक्ताओं ने इन समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यक्रम में बागपत सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल, आचार्य प्रमोद कृष्णम, शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र, जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह, वन संरक्षक आदर्श कुमार सहित कई वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। सभी ने नदी संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
हिंडन नदी का महत्व
हिंडन नदी सहारनपुर जिले की शिवालिक पर्वतमाला से निकलकर लगभग 400 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए गौतमबुद्ध नगर के पास यमुना नदी में मिलती है। यह नदी सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जैसे कई जिलों से होकर गुजरती है। काली नदी और कृष्णा नदी इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं।
दीर्घकालिक योजना पर रहेगा जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंडन नदी के संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए स्थानीय निकायों, सामाजिक संगठनों, उद्योगों और आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। कार्यक्रम में इस बात पर सहमति जताई गई कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार कार्ययोजना और जनसहयोग के माध्यम से नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।