Kerala – मुख्यमंत्री चयन में देरी पर कांग्रेस ने जल्द फैसले के दिए संकेत
Kerala – केरल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बावजूद कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाया है। चुनाव परिणाम आए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन राज्य में नई सरकार के नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। इस बीच केरल कांग्रेस अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने संकेत दिए हैं कि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर जल्द घोषणा हो सकती है।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य की राजनीति में जल्द “सफेद धुआं” दिखाई देगा। उनका यह बयान वेटिकन की उस पारंपरिक प्रक्रिया से प्रेरित माना जा रहा है, जिसमें नए पोप के चयन के बाद सफेद धुएं के जरिए आधिकारिक संकेत दिया जाता है। कांग्रेस नेतृत्व अब इस पूरे मामले को जल्द सुलझाने की कोशिश में जुटा हुआ है।
देरी से कार्यकर्ताओं में बढ़ी बेचैनी
सन्नी जोसेफ ने यह भी स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के उत्साह पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि लगातार बैठकों और चर्चा के कारण फैसला लेने में समय लग रहा है, लेकिन पार्टी नेतृत्व सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, आलाकमान ऐसा नाम तय करने की कोशिश कर रहा है जो संगठन, विधायकों और गठबंधन सहयोगियों के बीच संतुलन बना सके। यही वजह है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी स्तरों पर बातचीत जारी है।
सहयोगी दलों ने भी जताई नाराजगी
यूडीएफ के भीतर भी अब मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी को लेकर असंतोष दिखाई देने लगा है। गठबंधन सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर चिंता जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद भी सरकार गठन में देरी से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है।
वामपंथी दलों ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि स्पष्ट जनादेश मिलने के बाद नेतृत्व तय करने में इतनी देर होना जनता के भरोसे को कमजोर करता है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है।
तीन नेताओं के बीच फंसा मामला
मुख्यमंत्री पद की दौड़ फिलहाल तीन वरिष्ठ नेताओं के बीच मानी जा रही है। इनमें केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के नाम सबसे प्रमुख हैं। तीनों नेताओं का संगठन और विधायकों के बीच अलग-अलग स्तर पर प्रभाव माना जाता है।
कांग्रेस नेतृत्व इन नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि सरकार बनने के बाद किसी तरह की अंदरूनी गुटबाजी सामने न आए। पार्टी नहीं चाहती कि नेतृत्व को लेकर जल्दबाजी में लिया गया फैसला आगे चलकर राजनीतिक अस्थिरता का कारण बने।
पिछले अनुभवों से सतर्क कांग्रेस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार मुख्यमंत्री चयन में अतिरिक्त सावधानी बरत रही है। इससे पहले भी कई राज्यों में नेतृत्व तय करने में देरी और गुटबाजी के कारण पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए पार्टी इस बार सभी पक्षों की सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि लगातार बढ़ती देरी से पार्टी समर्थकों के बीच सवाल उठने लगे हैं। अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस आलाकमान कब अंतिम फैसला लेकर नए मुख्यमंत्री के नाम का आधिकारिक ऐलान करता है।