Kolkata Collapse – तारातला गोदाम हादसे के बाद जांच तेज, कई लोग रडार पर…
Kolkata Collapse – कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम ढहने की घटना के बाद राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ जांच भी तेज कर दी गई है। हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 20 घायलों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका के चलते बचाव कार्य लगातार जारी है। यह गोदाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट क्षेत्र के अंतर्गत एक निजी पट्टे वाली जमीन पर बनाया जा रहा था।

कई घंटे बाद भी जारी रहा बचाव अभियान
प्रशासन के मुताबिक, दुर्घटना के कई घंटे बाद भी भारी कंक्रीट और स्टील के मलबे को हटाने का काम जारी रहा। राहत दल आधुनिक उपकरणों की मदद से फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित स्थानों की सावधानीपूर्वक तलाशी ली जा रही है, इसलिए मृतकों की संख्या में बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
निर्माण से जुड़े तीन लोगों को किया गया गिरफ्तार
पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर निर्माण कार्य से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें साइट सुपरवाइजर सैयद मोहम्मद गुलजार के अलावा मजदूर उपलब्ध कराने वाले मोहम्मद अताउल और सुभाष चौधरी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई मृतक मजदूर के परिजनों की शिकायत पर दर्ज मामले के बाद की गई। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।
निर्माण स्वीकृति और दस्तावेजों की हो रही जांच
जांच एजेंसियों ने भवन निर्माण से संबंधित स्वीकृत नक्शे और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि निर्माण की मंजूरी निर्धारित नियमों के तहत दी गई थी या नहीं और निर्माण के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक अनियमितता तो नहीं हुई। पुलिस ने गोदाम के मालिकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है और पूरे निर्माण प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज
हादसे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं और समर्थकों ने इस घटना को लेकर विपक्ष की आलोचना पर आपत्ति जताई और कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में भी इस तरह की दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं विपक्षी दलों ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन ने फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग जांच को प्राथमिकता देने की बात कही है।
अन्य संबंधित पक्ष भी जांच के दायरे में
अधिकारियों के अनुसार, भूमि के पट्टाधारकों, निर्माण कंपनी से जुड़े लोगों और भवन स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि निर्माण कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों और निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संरचनात्मक सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस हादसे के बाद निर्माणाधीन व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था और स्वीकृति प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की जा सकती है। विशेषज्ञों की मदद से इमारत की संरचना, डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई और आवश्यक प्रशासनिक फैसले लिए जाएंगे।
फिलहाल बचाव अभियान और जांच समानांतर रूप से जारी हैं। प्रशासन का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष तकनीकी रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्यों और जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों के आधार पर ही सामने आएगा।