Latest Update: MBBS सीटें कम करने का फैसला 2 साल के लिए टला, सीटों की संख्या पर अब नहीं लगेगा ब्रेक
Latest Update: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में घोषणा की कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 2024-25 और 2025-26 शैक्षणिक वर्षों के लिए एमबीबीएस सीटों को सीमित करने का फैसला टाल दिया है। यह निर्णय संसद के अधिनियम द्वारा गठित सर्वोच्च वैधानिक निकाय (Medical Education Regulation) की तरफ से लिया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि दक्षिणी राज्यों पर 2023 के NMC निर्देश का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था, इसलिए इसे स्थायी रूप से लागू करने का निर्णय फिलहाल टाल दिया गया। (MBBS Seats)

एमबीबीएस सीटों की सीमा को टालने का कारण
एमबीबीएस सीटों पर रोक लगाने के फैसले को टालने का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा तक पहुंच में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना है। विशेषकर दक्षिणी राज्यों में पहले ही सीटों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक थी। सांसदों और अन्य हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया। (Medical Admission Update)
केंद्र सरकार द्वारा दी गई कुल सीटों की जानकारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 2025-26 शैक्षणिक वर्ष में देश में कुल 1,28,875 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी, जिसमें 65,193 सरकारी और 63,682 प्राइवेट सीटें शामिल हैं। मेडिकल पीजी के लिए कुल 80,291 सीटें हैं, जिनमें 17,707 DNB, DRNB, FNB और पोस्ट एमबीबीएस डिप्लोमा सीटें भी शामिल हैं। चार राउंड की ऑल इंडिया काउंसलिंग के बाद 72 सीटें खाली रह गई हैं। (MBBS Admission)
रिक्त सीटों का ब्योरा
72 रिक्त सीटों में 26 सरकारी और 46 डीम्ड यूनिवर्सिटी की सीटें शामिल हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने यह जानकारी राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के माध्यम से लोकसभा में दी। यह कदम मेडिकल शिक्षा में समावेशिता और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। (Medical Seats Distribution)
राज्यवार एमबीबीएस सीटें
देश के विभिन्न राज्यों में सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में उपलब्ध एमबीबीएस सीटों का विवरण इस प्रकार है:
- आंध्र प्रदेश: सरकारी 3415, प्राइवेट 3800
- तमिलनाडु: सरकारी 5250, प्राइवेट 7800
- महाराष्ट्र: सरकारी 6075, प्राइवेट 6749
- उत्तर प्रदेश: सरकारी 5925, प्राइवेट 7500
- केरल: सरकारी 1855, प्राइवेट 3549
कुल मिलाकर 65,193 सरकारी और 63,682 प्राइवेट सीटें हैं। (State wise MBBS seats)
असर
NMC के 2023 निर्देश के अनुसार प्रत्येक राज्य में प्रति 10 लाख आबादी पर केवल 100 एमबीबीएस सीटें निर्धारित करने की योजना थी। यदि यह लागू होती, तो केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसी दक्षिणी राज्य की मेडिकल शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। सीटों को टालने का निर्णय इन राज्यों के छात्रों और संस्थानों के हित में लिया गया। (NMC Guidelines)
सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की भूमिका
सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को शिक्षा देने की भूमिका समान है, लेकिन सीटों की संख्या और फीस संरचना में अंतर होता है। सरकारी कॉलेजों में कम फीस में शिक्षा मिलती है, जबकि प्राइवेट कॉलेजों में अधिक शुल्क होता है। दोनों प्रकार के कॉलेजों में कुल मिलाकर 1,28,875 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। (Government vs Private MBBS)
MBBS और मेडिकल PG की स्थिति
देश में मेडिकल पीजी की कुल 80,291 सीटें हैं। इनमें डीएनबी, डीआरएनबी और पोस्ट एमबीबीएस डिप्लोमा सीटें भी शामिल हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने संसद में साझा की। एमबीबीएस और मेडिकल पीजी दोनों स्तरों पर उपलब्ध सीटों का वितरण देशभर में मेडिकल शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करता है। (Medical PG Seats)
रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया
रिक्त 72 सीटों को भरने के लिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी ऑल इंडिया काउंसलिंग के माध्यम से योग्य छात्रों को चयनित करेंगे। इसमें 26 सरकारी और 46 डीम्ड यूनिवर्सिटी की सीटें शामिल होंगी। यह प्रक्रिया मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करती है। (MBBS Counseling)
भविष्य की मेडिकल शिक्षा पर प्रभाव
एमबीबीएस सीटों पर रोक लगाने का फैसला टालने से भविष्य में दक्षिणी राज्यों में मेडिकल शिक्षा में सुधार और छात्रों के लिए अधिक अवसर पैदा होंगे। यह कदम मेडिकल शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करता है और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है। (Medical Education Policy)



