LiquorBan – कश्मीर में शराबबंदी की मांग पर बीजेपी का प्रदर्शन तेज
LiquorBan – जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। शुक्रवार को श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने घाटी में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की मांग उठाई और सरकार पर युवाओं को गलत दिशा में धकेलने का आरोप लगाया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया।

शराबबंदी को लेकर बीजेपी का आक्रामक रुख
प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेताओं ने कहा कि पार्टी जम्मू-कश्मीर में शराब और अन्य नशे के खिलाफ अभियान चलाती रहेगी। बीजेपी नेता अल्ताफ ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कश्मीर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए शराब की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है।
ठाकुर ने कहा कि अगर सरकार ने शराबबंदी पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो पार्टी पूरे कश्मीर में व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। उनके मुताबिक यह विरोध दक्षिण कश्मीर से लेकर नियंत्रण रेखा के पास स्थित इलाकों तक फैलाया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई
मुख्यमंत्री आवास के बाहर बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। बीजेपी प्रवक्ता साजिद यूसुफ शाह के अनुसार, पुलिस ने कम से कम 10 लोगों को हिरासत में लिया था। हालांकि कुछ समय बाद सभी को रिहा कर दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन के नशामुक्ति अभियान पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर सरकार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है, तो उसमें शराब को भी शामिल किया जाना चाहिए।
फारूक और उमर अब्दुल्ला के बयानों पर विवाद
शराबबंदी का मुद्दा उस समय और चर्चा में आ गया जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में राज्य में पूर्ण प्रतिबंध की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा था कि केवल बिक्री रोक देने से शराब का सेवन पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। उन्होंने कहा था कि अतीत में भी सरकारों ने राजस्व नुकसान के कारण शराबबंदी लागू नहीं की थी। फारूक अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार राजस्व की भरपाई करे तो इस विषय पर विचार किया जा सकता है।
राजस्व बनाम सामाजिक प्रभाव की बहस
इस पूरे विवाद के बीच राज्य में शराबबंदी को लेकर दो अलग-अलग तर्क सामने आ रहे हैं। एक पक्ष सामाजिक और सांस्कृतिक आधार पर प्रतिबंध की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष आर्थिक प्रभाव और राजस्व को ध्यान में रखने की बात कह रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। खासकर तब, जब विभिन्न दल इसे सामाजिक और प्रशासनिक नजरिए से अलग-अलग तरीके से उठा रहे हैं।
आबकारी नीति पर भी उठे सवाल
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बीजेपी के विरोध पर पलटवार करते हुए कहा कि पूर्व की सरकारों के दौरान लागू की गई आबकारी नीति के तहत कई नए इलाकों में शराब की दुकानों की अनुमति दी गई थी। पार्टी प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि वर्तमान विवाद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जरूरी यह है कि नीति पर गंभीर और संतुलित चर्चा हो।
फिलहाल शराबबंदी को लेकर जम्मू-कश्मीर में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।