MBBS Degree Crisis In Gorakhpur: छात्रों को मुसीबत में डाल रही है बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की अधूरी दास्तां…
MBBS Degree Crisis In Gorakhpur: सामान्य तौर पर 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद साढ़े चार साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप पूरी कर युवा डॉक्टर बन जाते हैं। लेकिन गोरखपुर का बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज इन दिनों एक अजीबोगरीब (Medical-Education-Duration) वजह से चर्चा में है। यहाँ कुछ छात्र ऐसे हैं जो 15 साल तो क्या, पूरे 27 साल बाद भी अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाए हैं। उनकी अंतिम वर्ष की परीक्षा तो संपन्न हो चुकी है, लेकिन परिणाम अभी भी अधर में लटका हुआ है।

विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन के बीच फंसा रिजल्ट
डीडीयू (दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय) ने वर्तमान में तीन छात्रों का परिणाम रोक रखा है। इन छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन एक बार फिर विश्वविद्यालय को (Result-Declaration-Request) रिमाइंडर पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है। कॉलेज का तर्क है कि परिणाम जारी होते ही ये छात्र एक साल की इंटर्नशिप पूरी कर समाज की सेवा के लिए तैयार हो सकेंगे। प्रशासन इस जटिल मामले को सुलझाने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के पुराने नियमों का सहारा ले रहा है।
छात्रों का प्रोफाइल और उनकी लंबी शैक्षणिक यात्रा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ये छात्र अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इनमें से एक छात्र 1998 बैच का है, जो मूल रूप से आगरा का निवासी है। इसके अलावा 2009 बैच का छात्र मऊ और 2010 बैच का छात्र कुशीनगर का रहने वाला है। इन (Long-Term-Medical-Students) के भविष्य पर अब संजीदगी से विचार किया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन चाहता है कि जल्द से जल्द इनका परिणाम घोषित हो और ये अपनी इंटर्नशिप शुरू कर सकें।
अदालत की शरण में जाने की तैयारी और कानूनी पेच
परिणाम में हो रही अत्यधिक देरी को देखते हुए तीनों छात्र अब कानूनी रास्ता अपनाने पर विचार कर रहे हैं। वे अपने साथियों के साथ (Legal-Remedy-For-Students) के विकल्प पर चर्चा कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि डीडीयू ने पिछले सत्र में 18 ऐसे ही छात्रों का परिणाम जारी कर दिया था, तो उनके साथ यह भेदभाव क्यों हो रहा है। एनएमसी के सख्त नियमों के बावजूद वे पुराने नियमों के तहत राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
11 साल से प्रथम वर्ष में अटका एक अनोखा मामला
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पूरा करने में देरी का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। यहाँ एक छात्र ऐसा भी है जो पिछले 11 वर्षों से (MBBS-First-Year-Struggle) में ही अटका हुआ है। उसने 2014 में प्रवेश लिया था, लेकिन बार-बार फेल होने के कारण वह आगे नहीं बढ़ सका। छात्र के पिता, जो पुलिस विभाग में दारोगा हैं, उन्हें अब कॉलेज प्रशासन ने काउंसलिंग और चर्चा के लिए बुलाया है।
एमसीआई बनाम एनएमसी: नियमों का कानूनी जाल
इस मामले में सबसे बड़ा पेच नियमों के बदलाव को लेकर फंसा हुआ है। जब इन छात्रों का प्रवेश हुआ था, तब एमसीआई के नियम लागू थे जिनमें समय की कोई (Regulatory-Policy-Ambiguity) सख्त बंदिश नहीं थी। अब एनएमसी के नियम लागू हो चुके हैं, जो कहते हैं कि पूरा कोर्स 9 साल के भीतर खत्म होना चाहिए। अब यह एक विधिक प्रश्न बन गया है कि क्या पुराने छात्रों पर नए नियम लागू किए जा सकते हैं।
22 साल की पढ़ाई और गोरखपुर का पुराना रिकॉर्ड
बीआरडी मेडिकल कॉलेज का इतिहास ऐसे कई किस्सों से भरा है। यहाँ पहले भी कई छात्र 10 से 12 साल में कोर्स पूरा करते रहे हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाला रिकॉर्ड (Historical-MBBS-Record) वर्ष 1980 के एक छात्र का है, जिसने अपनी एमबीबीएस की डिग्री 22 साल में पूरी की थी। वह छात्र गोरखपुर का ही रहने वाला था और उसने सामान्य श्रेणी में दाखिला लिया था।



