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MiddleEast – लोकसभा में आज पश्चिम एशिया संकट पर बयान देंगे एस जयशंकर

MiddleEast – संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार से होने जा रही है और इसी दिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात पर सरकार का आधिकारिक बयान देंगे। रविवार शाम जारी संशोधित कार्यसूची के अनुसार, जयशंकर सदन को क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव और वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष भी लगातार चर्चा की मांग कर रहा है।

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संसद में चर्चा की मांग के बीच एजेंडा में बदलाव

लोकसभा की शुरुआती कार्यसूची में सोमवार के लिए विपक्ष समर्थित वह प्रस्ताव ही प्रमुख रूप से सूचीबद्ध था, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने की मांग की गई है। हालांकि बाद में जारी संशोधित कार्यक्रम में विदेश मंत्री का बयान भी शामिल कर लिया गया। विपक्षी दलों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। इसी पृष्ठभूमि में सरकार की ओर से स्थिति पर आधिकारिक जानकारी देने का फैसला किया गया है।

52 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे

विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में हवाई सेवाओं के आंशिक रूप से फिर शुरू होने के बाद अब तक 52 हजार से ज्यादा भारतीय नागरिक स्वदेश लौट चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावास और मिशन लगातार वहां मौजूद नागरिकों से संपर्क बनाए हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने यह भी कहा है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं और सुरक्षा स्थिति को लगातार नजदीकी से मॉनिटर किया जा रहा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य टकराव

पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की जा रही है, जबकि ईरान भी जवाबी हमलों में क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर मौजूद इजराइली और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इन घटनाओं के कारण पूरे इलाके में सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

ईरान पर हमले के बाद संघर्ष तेज

बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया था। इस कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सहित कई लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ गईं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत समेत कई स्थानों की ओर ड्रोन और मिसाइल दागे। इनमें वे स्थान प्रमुख रूप से निशाने पर रहे, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं।

तेल ठिकानों पर हमलों से भारी नुकसान

संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान के तेल रिफाइनरी और भंडारण केंद्रों को भी निशाना बनाया। तेहरान के स्थानीय लोगों के अनुसार, एक बड़े तेल डिपो में लगी आग से उठने वाला धुआं इतना घना था कि आसपास के इलाके में दिन के समय भी अंधेरे जैसा माहौल हो गया। आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी और आसपास के कई इलाकों को अस्थायी रूप से खाली भी कराया गया।

कुवैत में सरकारी इमारत पर ड्रोन हमला

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में ‘पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी’ की बहुमंजिला इमारत को ड्रोन से निशाना बनाया। हमले के बाद इमारत में आग लग गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को कई घंटे तक प्रयास करना पड़ा। इस घटना ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

एक सप्ताह में भारी जनहानि

रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य टकराव के बाद से अब तक एक सप्ताह के भीतर लगभग 1200 नागरिकों की जान जा चुकी है। लगातार हो रहे हमलों के कारण कई शहरों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील कर रहा है।

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