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MNREGA – केंद्र ने मजदूरी भुगतान के लिए पहली किस्त जारी की

MNREGA – केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत करते हुए मजदूरी मद के लिए 17,744 करोड़ रुपये की पहली किस्त राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी कर दी है। इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले श्रमिकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और रोजगार की निरंतरता बनाए रखना है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, इस समय काम की मांग सामान्य स्तर पर बनी हुई है और किसी असामान्य वृद्धि के संकेत नहीं मिले हैं।

mnrega wage first installment released

ग्रामीण मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर

सरकार का ध्यान इस बार विशेष रूप से इस बात पर है कि मजदूरों को उनकी मेहनत का भुगतान तय समय के भीतर मिले। मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि जारी की गई राशि का उपयोग प्रभावी ढंग से किया जाए ताकि भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। आमतौर पर वर्ष के इस समय में विभिन्न राज्यों में रोजगार की मांग बढ़ती है, ऐसे में यह फंड ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर आय का प्रवाह बना रहेगा और छोटे स्तर के आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

नई योजना लागू होने तक जारी रहेगी वर्तमान व्यवस्था

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित वीबी-जी राम जी एक्ट लागू होने तक मौजूदा मनरेगा योजना पूरी तरह सक्रिय रहेगी। इस दौरान काम मांगने वाले प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि नई व्यवस्था में बदलाव को सहज बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। जब तक नई मजदूरी दरों की घोषणा नहीं होती, तब तक वर्तमान दरें ही लागू रहेंगी और भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा।

रोजगार और विकास योजनाओं में संतुलन बनाए रखने की कोशिश

मनरेगा के साथ-साथ अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं पर भी सरकार का फोकस बना हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत मार्च 2029 तक लगभग 4.95 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के जरिए पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नए चरण में 12,100 किलोमीटर सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

चालू वित्त वर्ष में अब तक बड़ी राशि जारी

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक 81,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की जा चुकी है। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने संसद में बताया कि मजदूरी का भुगतान लगातार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।

लंबित देनदारियों का भी रखा जा रहा है ध्यान

11 मार्च 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्यों में कुल लंबित देनदारियां लगभग 18,862 करोड़ रुपये थीं। इसमें मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्च शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि इन बकाया भुगतानों को जल्द से जल्द निपटाया जाए ताकि श्रमिकों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही भविष्य में भुगतान प्रणाली को और अधिक सुचारू बनाने पर भी काम किया जा रहा है।

आर्थिक गतिविधियों को गति देने में योजना की भूमिका

मनरेगा केवल रोजगार देने की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। समय पर फंड जारी होने से गांवों में क्रय शक्ति बनी रहती है, जिससे स्थानीय बाजारों में गतिविधियां बढ़ती हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस वित्तीय सहायता से आने वाले महीनों में रोजगार और विकास दोनों को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

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