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Parliament – लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी और महिला आरक्षण पर सरकार का नया मंथन

Parliament – केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण कानून को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए विभिन्न संवैधानिक विकल्पों पर विचार कर रही है। सरकारी स्तर पर तैयार किए जा रहे प्रारंभिक प्रस्तावों में राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ भविष्य के परिसीमन को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है। अभी इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन कई संभावित मॉडल पर मंथन जारी है।

nda loksabha seat expansion formula

दक्षिणी राज्यों की चिंताओं पर विशेष ध्यान

परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के कई राज्यों ने लंबे समय से यह आशंका जताई है कि यदि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया तो संसद में उनका प्रभाव कम हो सकता है। इसी कारण सरकार ऐसे प्रस्तावों पर विचार कर रही है, जिनसे मौजूदा राजनीतिक संतुलन प्रभावित न हो। सूत्रों के अनुसार, नए मसौदे में राज्यों के बीच वर्तमान सीट अनुपात को सुरक्षित रखने का विकल्प भी शामिल किया गया है।

पुराने अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव

जानकारी के अनुसार, सरकार के विचाराधीन प्रस्तावों में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का मौजूदा अनुपात बरकरार रखने का सुझाव शामिल है। वहीं, निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किए जाने पर भी चर्चा हो रही है। चूंकि नवीनतम जनगणना के अंतिम आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए फिलहाल पुराने उपलब्ध आंकड़ों को आधार बनाने का विकल्प देखा जा रहा है।

लोकसभा सीटों में बड़े विस्तार की संभावना

सरकारी योजना के तहत लोकसभा की कुल सीटों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है। माना जा रहा है कि इससे बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के साथ महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को भी व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।

संसद में पर्याप्त समर्थन मिलने का इंतजार

संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। बताया जा रहा है कि सरकार तभी इस विधेयक को संसद में पेश करेगी, जब उसे आवश्यक संख्या बल मिलने का भरोसा होगा। वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास लोकसभा में करीब 300 सांसद हैं, जबकि संविधान संशोधन पारित कराने के लिए इससे अधिक समर्थन की जरूरत होगी।

महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी

मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत महिला आरक्षण का क्रियान्वयन परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है, जिसके चलते इसके 2034 से पहले लागू होने की संभावना सीमित मानी जाती है। सरकार चाहती है कि यदि आवश्यक संवैधानिक संशोधन हो जाएं तो 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। इसके लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में आवश्यक बदलाव पर भी विचार किया जा रहा है।

पहले पेश हो चुका है संशोधन प्रस्ताव

अप्रैल में प्रस्तुत संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। इस मसौदे में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में क्रमवार आधार पर आवंटित करने का प्रावधान शामिल था। फिलहाल सरकार विभिन्न विकल्पों का अध्ययन कर रही है और किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

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