Parliament – लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज होगी चर्चा
Parliament – लोकसभा में आज एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है, जब विपक्ष द्वारा लाए गए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना है। संसद की संशोधित कार्यसूची के अनुसार 9 मार्च को इस प्रस्ताव से जुड़ी प्रक्रिया सदन में आगे बढ़ाई जाएगी। विपक्षी दलों ने पहले ही इस मुद्दे को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी और 10 फरवरी को औपचारिक नोटिस दिया था, जिस पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। विपक्ष का कहना है कि सदन की कार्यवाही के संचालन में निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, इसलिए इस प्रस्ताव पर चर्चा जरूरी है।

आज की कार्यसूची में प्रस्ताव से पहले अन्य कार्य
लोकसभा की संशोधित सूची के अनुसार, सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी। इसके बाद जरूरी सरकारी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाएंगे। इसके उपरांत विदेश मंत्री एस. जयशंकर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर एक विस्तृत बयान देंगे।
इन औपचारिक कार्यों के बाद कांग्रेस सांसद आर. मोहम्मद जावेद, कोडिकुन्निल सुरेश और मल्लू रवि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को सदन में पेश करने की अनुमति मांगेंगे। यदि सदन की ओर से इसकी अनुमति मिल जाती है, तो प्रस्ताव को उसी दिन औपचारिक रूप से लोकसभा में पेश किया जा सकता है और आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
विपक्ष के आरोप: पक्षपात और अवसर न देने का मुद्दा
विपक्षी दलों का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि कई मौकों पर विपक्ष के सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला, जबकि सत्तारूढ़ दल के कुछ सदस्यों की आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई नहीं की गई।
विपक्ष का यह भी कहना है कि जब विपक्षी सांसद जनता से जुड़े मुद्दे उठाते हैं तो उन्हें सत्र से निलंबित कर दिया जाता है। इसके उलट, पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले कुछ सदस्यों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। विपक्ष का दावा है कि इन घटनाओं से सदन में निष्पक्षता की भावना प्रभावित हुई है और यही कारण है कि उन्होंने यह कदम उठाया।
निष्पक्षता को लेकर उठाए गए सवाल
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वे सदन के सभी पक्षों का भरोसा बनाए रखें और निष्पक्ष तरीके से कार्यवाही चलाएं। विपक्ष का आरोप है कि हाल के समय में कुछ निर्णयों और घोषणाओं से यह धारणा बनी है कि सत्ता पक्ष को प्राथमिकता दी जा रही है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सदन के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना स्पीकर की जिम्मेदारी होती है, लेकिन कई विवादित मामलों में उनका रुख सत्ता पक्ष के पक्ष में दिखाई देता है। इसी आधार पर विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया।
लोकसभा स्पीकर को हटाने की संसदीय प्रक्रिया
संविधान और लोकसभा के नियमों के अनुसार, स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। इसके लिए कम से कम दो सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नोटिस दिया जाता है और नोटिस देने के बाद कम से कम 14 दिन का समय आवश्यक होता है।
जब प्रस्ताव सदन में पेश किया जाता है तो उसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। इस दौरान प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। प्रस्ताव पर बहस के दौरान स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करते। आमतौर पर यह जिम्मेदारी डिप्टी स्पीकर निभाते हैं।
हालांकि फिलहाल डिप्टी स्पीकर का पद खाली होने के कारण स्पीकर के पैनल में शामिल वरिष्ठ सदस्य कार्यवाही की अध्यक्षता कर सकते हैं।
बहुमत का गणित और विपक्ष की चुनौती
लोकसभा में स्पीकर को हटाने के लिए साधारण बहुमत यानी कम से कम 272 वोटों की जरूरत होती है। मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखें तो विपक्ष के सामने यह लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा है।
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास फिलहाल करीब 293 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है। इनमें भारतीय जनता पार्टी के लगभग 240 सांसद, जनता दल (यूनाइटेड) के 16, तेलुगु देशम पार्टी के 12 और अन्य सहयोगी दलों के सदस्य शामिल हैं।
दूसरी ओर विपक्ष के पास करीब 238 सांसद हैं। इनमें कांग्रेस के 99 सदस्य हैं, जबकि समाजवादी पार्टी, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों के सांसद भी विपक्षी खेमे में शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस ने प्रस्ताव का समर्थन करने का संकेत दिया है, फिर भी संख्या के लिहाज से विपक्ष के लिए साधारण बहुमत जुटाना फिलहाल चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।



