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Parliament – राज्यसभा में एनडीए की बढ़ती ताकत, दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचे नए समीकरण

Parliament – राज्यसभा में हाल के घटनाक्रमों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत होती दिखाई दे रही है। विभिन्न राज्यों से निर्वाचित नए सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद सदन में गठबंधन की संख्या बढ़ी है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस स्थिति को केंद्र सरकार के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि आने वाले समय में कुछ महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को संसद में लाने की संभावना जताई जा रही है।

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नए सांसदों के शपथ लेने से बढ़ी संख्या

सोमवार को गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश से निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी के चार नए सदस्यों ने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली। इनमें गुजरात से जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया और मानसिंह मेरामन परमार, कर्नाटक से एम. नागराजा तथा मध्य प्रदेश से तरुण चुघ शामिल हैं। इन नए सदस्यों के सदन में आने के बाद 242 सदस्यीय मौजूदा राज्यसभा में एनडीए के अपने सांसदों की संख्या बढ़कर 141 हो गई है।

मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों का भी समर्थन

सिर्फ गठबंधन के सांसद ही नहीं, बल्कि कुछ मनोनीत और निर्दलीय सदस्य भी सरकार के पक्ष में खड़े नजर आते हैं। ऐसे लगभग 10 सदस्यों का समर्थन जोड़ने पर सरकार के पक्ष में कुल संख्या 151 तक पहुंचती है। यह साधारण बहुमत से कहीं अधिक है, लेकिन संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से अभी भी दूरी बनी हुई है।

संविधान संशोधन के लिए कितनी संख्या जरूरी

राज्यसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए कुल सदस्य संख्या के आधार पर 164 मतों की आवश्यकता होती है। मौजूदा स्थिति में सरकार समर्थक खेमे के पास 151 सदस्यों का समर्थन माना जा रहा है। यानी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी 13 अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी संसदीय रणनीति में यह संख्या महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

क्षेत्रीय दलों की भूमिका पर नजर

संसद के भीतर कुछ ऐसे क्षेत्रीय दल भी हैं जो औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और पहले भी कई अहम विधेयकों पर सरकार का समर्थन कर चुके हैं। इनमें ओडिशा की बीजू जनता दल (बीजेडी) के पांच और आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस के चार राज्यसभा सदस्य शामिल हैं। यदि भविष्य में ये दोनों दल किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार का साथ देते हैं, तो सरकार समर्थक संख्या बढ़कर 160 तक पहुंच सकती है। इससे दो-तिहाई बहुमत का अंतर और कम हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल की सीटों से बदल सकते हैं समीकरण

राज्यसभा की पश्चिम बंगाल से रिक्त होने वाली तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो एनडीए की कुल ताकत 163 तक पहुंच सकती है, जो दो-तिहाई बहुमत के आवश्यक आंकड़े से केवल एक सीट कम होगी।

महत्वपूर्ण विधेयकों पर बढ़ सकती है सरकार की सक्रियता

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि राज्यसभा में सरकार की स्थिति और मजबूत होती है तो कुछ महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। इनमें परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विषयों का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि इन मुद्दों पर सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा और अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

लोकसभा में अब भी आसान नहीं है रास्ता

राज्यसभा में मजबूत होती स्थिति के बावजूद लोकसभा में सरकार के सामने अलग चुनौती बनी हुई है। वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास लगभग 300 सांसद हैं, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए 540 सदस्यीय सदन में 360 मतों की आवश्यकता होती है। कुछ दलों के बागी सांसदों से जुड़े मामलों पर निर्णय आने के बाद भी यह लक्ष्य काफी दूर माना जा रहा है। ऐसे में सरकार को किसी भी संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक के लिए दोनों सदनों में व्यापक समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम करना होगा।

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