Politics – तमिलनाडु चुनाव से पहले कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल
Politics – तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस की करूर से सांसद एस. ज्योतिमणि ने डीएमके गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सीट चयन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और इसमें पार्टी के हितों की अनदेखी की गई है। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल के बीच गठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।

सीट चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
ज्योतिमणि ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सीटों के चयन में पारदर्शिता का अभाव रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सुझाव दिया था कि इस प्रक्रिया को खुली चर्चा और स्पष्ट मानकों के आधार पर किया जाए, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। उनके मुताबिक, इस तरह के फैसलों से कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका कमजोर होती है। इस चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन के तहत 28 सीटें मिली हैं।
गठबंधन में अंदरूनी असंतोष के संकेत
सांसद का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य की प्रमुख पार्टियां चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे रही हैं। डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, वहीं कुछ नई राजनीतिक ताकतें भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर उठे सवाल विपक्षी दलों के लिए भी मुद्दा बन सकते हैं।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
ज्योतिमणि ने राज्य नेतृत्व पर आरोप लगाया कि सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को उचित महत्व नहीं मिल रहा, जबकि बाहरी या कम सक्रिय लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस स्थिति को उन्होंने पार्टी के लिए चिंताजनक बताया।
चेतावनी भरा बयान और आगे की रणनीति
सांसद ने यह भी कहा कि यदि यही तरीका जारी रहा तो इसका असर पार्टी के भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर आगे भी अपनी बात रखती रहेंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि जैसे ही उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची सामने आएगी, वह इस पर और विस्तार से प्रतिक्रिया देंगी।
चुनाव की पृष्ठभूमि और स्थिति
तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। चुनाव से पहले सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर उठ रही आवाजें राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन आरोपों पर पार्टी नेतृत्व किस तरह प्रतिक्रिया देता है।