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Politics – विधानसभा में विवादित बयान पर गरमाई सियासत, कड़ी कार्रवाई के दिखे संकेत

Politics – पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब राज्य सरकार ने नौदा से विधायक हुमायूं कबीर के कथित भड़काऊ बयानों को गंभीर मानते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए। विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले किसी भी बयान को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा और सरकार ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाएगी।

assembly controversial speech action

विधानसभा में मुख्यमंत्री का बयान

सदन में संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष के साथ चर्चा और विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति के बाद मुख्यमंत्री ने हुमायूं कबीर के दो विवादित भाषणों के अंश पढ़कर सुनाए। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी तरह की हिंसा भड़काने या सामाजिक तनाव पैदा करने वाली भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी टिप्पणी की कि संबंधित विधायक को अपने सार्वजनिक बयानों की गंभीरता समझनी चाहिए और भविष्य में ऐसे मामलों पर कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।

भाजपा विधायकों ने जताया विरोध

इस मुद्दे को लेकर विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायकों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का आरोप था कि हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया और अपने भाषणों के जरिए हिंसा को बढ़ावा देने की कोशिश की। भाजपा सदस्यों ने पोस्टर दिखाते हुए कार्रवाई की मांग की और सदन में नारेबाजी भी की।

सदन में बढ़ा राजनीतिक तनाव

भाजपा विधायक पुना भेंगरा ने सबसे पहले यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाया। इसके बाद विधायक रमाप्रसाद गिरि सहित कई अन्य विपक्षी सदस्यों ने भी इस विषय पर सरकार से जवाब मांगा। सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरे मामले पर विस्तृत वक्तव्य देंगे।

विवादित भाषण का किया गया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान 26 जून को रेजीनगर क्षेत्र के काशीपुर में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उसी कार्यक्रम में हुमायूं कबीर ने ऐसा भाषण दिया था, जिसमें भाजपा नेताओं और पार्टी समर्थकों को लेकर विवादित टिप्पणियां की गई थीं। सरकार का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माने जा सकते।

कानून-व्यवस्था पर सरकार का सख्त रुख

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी व्यक्ति को हिंसा या वैमनस्य फैलाने वाली भाषा इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयान संविधान और कानून की मर्यादा के भीतर होने चाहिए। मामले को लेकर आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

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