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RajyaSabha – बदलते समीकरणों के बीच NDA बहुमत के और करीब

RajyaSabha – संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। हाल के राज्यसभा चुनावों और तृणमूल कांग्रेस में उभरे आंतरिक संकट के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संख्या में बढ़ोतरी की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि आगामी चुनावों और संभावित रिक्तियों के बाद उच्च सदन में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से अधिक मजबूत हो सकती है।

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राज्यसभा में बढ़ सकती है NDA की ताकत

राज्यसभा की वर्तमान संरचना को देखते हुए NDA के पास फिलहाल 148 सदस्यों का समर्थन माना जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, झारखंड और मिजोरम की कुछ सीटों पर होने वाले चुनावों के बाद गठबंधन को अतिरिक्त बढ़त मिल सकती है। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफों की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे भविष्य में होने वाले उपचुनाव सत्ता पक्ष के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।

दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की चर्चा

संसदीय गणित के अनुसार राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए 163 सदस्यों का समर्थन आवश्यक माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि आगामी चुनावों और संभावित रिक्त सीटों पर NDA को सफलता मिलती है, तो गठबंधन इस आंकड़े के काफी करीब पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में संवैधानिक संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को पारित कराने में सरकार की स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

विपक्षी खेमे की संख्या में बदलाव

दूसरी ओर, विपक्षी दलों के समूह INDIA की संख्या में भी बदलाव देखने को मिला है। कुछ क्षेत्रीय दलों द्वारा अलग राजनीतिक रुख अपनाने के बाद विपक्ष की संयुक्त ताकत पहले की तुलना में सीमित हुई है। मौजूदा परिस्थितियों में विपक्षी गठबंधन के पास राज्यसभा में अपेक्षाकृत कम सदस्य संख्या बची है, जिससे सदन में उसकी रणनीतिक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

लोकसभा में भी बदल रहे हैं समीकरण

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम ने भी नई चर्चा को जन्म दिया है। पार्टी के 20 सांसदों ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया है और एक अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय की घोषणा की है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग समूह के रूप में मान्यता देने और सदन में पृथक बैठने की अनुमति का अनुरोध भी किया है।

बागी सांसदों ने पेश किया अपना दावा

इस समूह का कहना है कि उसके साथ लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि संबंधित सांसदों ने संयुक्त रूप से अध्यक्ष को आवेदन सौंपा है। उनका दावा है कि संसदीय नियमों के अनुसार उन्हें अलग समूह के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।

असली राजनीतिक पहचान पर कानूनी फैसला संभव

बागी खेमे में शामिल वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा है कि किसी राजनीतिक दल की वास्तविक पहचान और वैध प्रतिनिधित्व का फैसला अंततः संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत होगा। उनके अनुसार, वर्तमान में किया गया विलय एक राजनीतिक कदम है, जबकि पार्टी के नाम और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय संबंधित संस्थाएं लेंगी।

आगे क्या रह सकता है असर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में संसद की संख्या और दलों की स्थिति में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ राज्यों से राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जिससे नई राजनीतिक परिस्थितियां बन सकती हैं। साथ ही ऐसे दल, जो किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, भविष्य में संसद के भीतर शक्ति संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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