RajyaSabhaElection – तीन राज्यों में 11 सीटों पर मतदान, कई जगह दिलचस्प मुकाबले
RajyaSabhaElection – राज्यसभा की रिक्त हो रही सीटों के लिए होने वाले चुनाव में इस बार ज्यादातर राज्यों में तस्वीर पहले से साफ नजर आ रही है। कुल दस राज्यों की 37 सीटों में से अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। केवल तीन राज्यों—बिहार, ओडिशा और हरियाणा—की 11 सीटों पर ही मतदान की स्थिति बनती दिख रही है। इन राज्यों में राजनीतिक समीकरणों और दलों की रणनीति के कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया है। खास तौर पर ओडिशा और हरियाणा में सत्तारूढ़ दलों और विपक्ष के बीच राजनीतिक गणित ने चुनाव को अधिक रोचक बना दिया है, जबकि बिहार में भी एक सीट को लेकर कड़ा मुकाबला बनने की संभावना जताई जा रही है।

ओडिशा में चौथी सीट पर मुकाबला हुआ रोचक
ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव होना है और यहां राजनीतिक समीकरणों ने खासा ध्यान खींचा है। राज्य विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी दो सीटें और बीजू जनता दल एक सीट जीत सकती है। हालांकि चौथी सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प बन गया है।
इस सीट के लिए भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय और बीजद के दत्तेश्वर होता आमने-सामने हैं। चुनावी गणित के अनुसार जीत हासिल करने के लिए 30 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास अपने 79 विधायकों के अलावा तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी है, जिससे उसके पास शुरुआती बढ़त मानी जा रही है।
हालांकि तीसरे उम्मीदवार के लिए वोटों की संख्या सीमित होने के कारण स्थिति पूरी तरह एकतरफा नहीं है। दिलीप राय को जीत सुनिश्चित करने के लिए अभी कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। दूसरी ओर बीजद के पास 48 विधायक हैं और चौथी सीट जीतने के लिए उसे भी अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों का रुख इस मुकाबले में अहम भूमिका निभा सकता है।
बिहार में एक सीट को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
बिहार में इस बार राज्यसभा चुनाव ने खासा राजनीतिक ध्यान खींचा है, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उम्मीदवारों के चयन और समीकरणों को लेकर चर्चा में हैं। राज्य की पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण एक सीट पर मुकाबला होना लगभग तय माना जा रहा है।
राज्य विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 202 विधायक हैं। जीत के लिए 41 वोटों की आवश्यकता होती है, ऐसे में भाजपा और जनता दल (यू) के दो-दो उम्मीदवारों की जीत को लेकर फिलहाल कोई खास चुनौती दिखाई नहीं देती। मुख्य मुकाबला एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के बीच माना जा रहा है।
इस सीट पर जीत के लिए दोनों पक्षों को कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी और एआईएमआईएम के विधायकों की भूमिका अहम हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छोटे दलों के विधायकों का रुख अंतिम परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
हरियाणा में क्रॉस वोटिंग की आशंका
हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। यहां भाजपा की ओर से संजय भाटिया उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके साथ ही निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला और जटिल हो गया है।
सतीश नांदल पहले भी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं और अतीत में भाजपा के टिकट पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार उनके निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस के लिए समीकरण कुछ मुश्किल हो सकते हैं।
विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार को जीत के लिए 31 वोटों की आवश्यकता है। संख्या के लिहाज से कांग्रेस के लिए जीत संभव दिखती है, लेकिन क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर पार्टी सतर्क नजर आ रही है। हरियाणा में पिछले चुनावों में भी ऐसी स्थिति देखी जा चुकी है, इसलिए इस बार भी मतदान के दौरान विधायकों की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।



