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RSSClarification – अमेरिका में दत्तात्रेय होसबोले ने संघ पर उठे सवालों का दिया जवाब

RSSClarification – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने अमेरिका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संघ और भारत को लेकर फैली अंतरराष्ट्रीय धारणाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आरएसएस की तुलना अमेरिकी श्वेत वर्चस्ववादी संगठन ‘कु क्लक्स क्लान’ से करना न केवल गलत है, बल्कि वास्तविकता से पूरी तरह परे है। उनका यह बयान हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में सामने आया, जहां उन्होंने लेखक वाल्टर रसेल मीड के साथ संवाद किया।

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अमेरिका में भारत की छवि पर उठाए सवाल

होसबोले ने इस बात पर चिंता जताई कि पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका में भारत की छवि अब भी पुराने नजरिए से देखी जाती है। उन्होंने कहा कि कई लोग आज भी भारत को केवल गरीबी, झुग्गियों और पारंपरिक प्रतीकों तक सीमित करके देखते हैं। जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है। भारत आज तकनीकी क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की प्रगति के इन पहलुओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

आरएसएस को लेकर गलत धारणाओं का जिक्र

संघ के बारे में फैली भ्रांतियों पर बोलते हुए होसबोले ने कहा कि लंबे समय से एक खास तरह का नैरेटिव बनाया गया है, जिसमें आरएसएस को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने बताया कि संगठन को अक्सर अल्पसंख्यक विरोधी, आधुनिकता विरोधी या कट्टर विचारधारा से जोड़कर देखा जाता है। उनका कहना था कि संघ के सामाजिक कार्यों और सकारात्मक पहलुओं को सामने लाने के बजाय केवल एकतरफा तस्वीर पेश की जाती रही है।

हिंदू दर्शन का मूल स्वरूप समझाया

होसबोले ने हिंदू विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मूल भाव समावेशिता और एकता में विश्वास करना है। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा में पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की भावना है। जब मूल सोच ही सार्वभौमिक एकता की हो, तो किसी प्रकार के वर्चस्व की बात अपने आप खारिज हो जाती है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए यह भी कहा कि भारत की परंपरा में दूसरे देशों पर आक्रमण करने का कोई उदाहरण नहीं मिलता।

संघ की जमीनी गतिविधियों पर प्रकाश

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आरएसएस की कार्यप्रणाली और उसके सामाजिक योगदान के बारे में भी विस्तार से बताया। उनके अनुसार देशभर में प्रतिदिन हजारों शाखाएं आयोजित की जाती हैं, जिनका उद्देश्य समाज में अनुशासन, सेवा और सहयोग की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी स्वयंसेवक राहत कार्यों में अग्रिम पंक्ति में नजर आते हैं।

संस्कृति और आधुनिकता के संतुलन की बात

होसबोले ने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक विकास और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच कोई टकराव नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज अगर अपने मूल्यों को बनाए रखते हुए तकनीकी और औद्योगिक विकास को अपनाता है, तो दोनों का संतुलन संभव है। उन्होंने जापान और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिकता को सफलतापूर्वक अपनाया है।

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