राष्ट्रीय

SecurityOperation – मणिपुर में छह नागा नागरिकों के शव मिलने से बढ़ा तनाव, बंद का ऐलान

SecurityOperation – मणिपुर के कांगपोकपी जिले में छह लापता नागा नागरिकों के शव बरामद होने के बाद राज्य में एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। इन लोगों के 13 मई को कथित तौर पर अपहरण किए जाने की बात सामने आई थी। शवों की बरामदगी के बाद नागा समुदाय के प्रमुख संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने नागा बहुल क्षेत्रों में 24 घंटे के बंद का आह्वान किया है। साथ ही संगठन ने राज्य की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।

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व्यापक तलाशी अभियान के बाद मिली सफलता

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमों ने लगातार 24 घंटे तक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान में करीब 15 सुरक्षा दल शामिल थे। मणिपुर के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने बताया कि बरामद शव उन छह लोगों के होने की आशंका है जिन्हें मई में लीलोन वैफेई गांव से बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी। फिलहाल पहचान और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

यूएनसी ने उपमुख्यमंत्री पर उठाए सवाल

शव मिलने के बाद यूएनसी ने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को तत्काल पद से हटाने की मांग दोहराई है। संगठन का आरोप है कि उनका पारिवारिक संबंध कुकी नेशनल फ्रंट-पी (केएनएफ-पी) के अध्यक्ष सेमटिनथांग किपगेन से है। केएनएफ-पी उन संगठनों में शामिल है जो सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौते के तहत आते हैं।

यूएनसी का दावा है कि नागा नागरिकों की हत्या की घटना में संबंधित गुट की भूमिका की आशंका है। संगठन ने लीलोन वैफेई गांव के कुछ निवासियों पर भी अपहरण में शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है।

शव लेने से इनकार, समझौतों की समीक्षा की मांग

नागा संगठन का कहना है कि बरामद शव गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले हैं। यूएनसी ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक समुदाय शवों को स्वीकार नहीं करेगा। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से कुकी उग्रवादी समूहों के साथ किए गए एसओओ समझौतों की भी समीक्षा करने और उन्हें समाप्त करने की मांग की है।

यूएनसी का कहना है कि यह घटना क्षेत्र में रहने वाले नागा समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है और प्रशासन को जवाबदेही तय करनी चाहिए।

समुदाय में शोक और आक्रोश

लियांगमाई नागा काउंसिल के अध्यक्ष टिमोथी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लापता लोगों के मृत मिलने से समुदाय को बड़ा झटका लगा है। उनके अनुसार, परिजन अभी शवों की औपचारिक पहचान की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं और पूरे मामले ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

13 मई की घटना से जुड़ा है मामला

जानकारी के अनुसार, 13 मई को कांगपोकपी जिले में हुए एक हमले में थाडौ जनजाति के तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद दो पादरियों समेत छह नागा नागरिकों और उनके परिजनों के अपहरण की खबर सामने आई थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, उस दौरान कांगपोकपी और सेनापति जिलों में विभिन्न समुदायों से जुड़े कुल 44 लोगों को बंधक बनाया गया था। बाद में महिलाओं और बच्चों सहित कुछ लोगों को रिहा कर दिया गया। हाल ही में कुकी समुदाय के 14 लोगों की रिहाई हुई थी, जबकि अब छह नागा नागरिकों के शव बरामद किए गए हैं।

मेघालय के मुख्यमंत्री ने जताई चिंता

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने इस घटना को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना ऐसे समय हुई है जब विभिन्न पक्षों के बीच संवाद और विश्वास बहाली की कोशिशें चल रही थीं। संगमा ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की मौत किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की। उनके अनुसार, क्षेत्र में स्थायी शांति केवल आपसी विश्वास, सम्मान और संवाद से ही स्थापित की जा सकती है।

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